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पर्दाफाश

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🎯🕺जहाँ चाह है वहाँ राह है🕺-भूपेन्द्र किशोर वैष्णव🎯*

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वरिष्ठ पत्रकार अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता भूपेंद्र किशोर वैष्णव जी जो हमेशा सामाजिक कार्यों में लीन रहतें है जो राह चलते भी लोगों का सहयोग करते हैं जिनकी पारखी नजर हमेशा छोटी सी छोटी और बड़ी सी बड़ी बातों में हमेशा सकारात्मकता खोजतें है आज राह चलते एक दिव्यांग व्यक्ति से भी भरपूर सकारात्मक बातें हम सबके सामने लाएं हैं उनके लघु लेख से हम समझते है किस तरह जहां चाह है वहां राह है बहाने बनाने से जिंदगियां नही चलती…..!!

भूपेंद्र किशोर वैष्णव जी का लेख

 

*🎯🕺जहाँ चाह है वहाँ राह है🕺🎯*

दोस्तों कहतें है यदि इंसान कोई कार्य करने की ठान ले तो उसे उस कार्य को करने से कोई भी नही रोक सकता है। जी हाँ आज ऐसा ही प्रेरणा दायक घटना मेरे साथ हुआ जब आज लगभग 12:35 बजे मैं बिलासपुर कोर्ट के पास खड़ा था तब मेरे बगल में एक युवक ने आकर मुझसे कहा कि भैया क्या मुझे कलेक्ट्रेट तक सड़क पार करा दोगे । तब मैंने मुड़कर उस युवक के तरफ देखा तो उसके पास 2 छड़ी थी एक बैग पीठ में लटका हुआ था। मैंने उसकी एक छड़ी पकड़ी और खुशी से उसे सड़क पार कराने लगा ।

 

मैंने उस युवक से पूछा कि आपको कलेक्ट्रेट में कहां जाना है तो उस युवक ने बहुत की विनम्रता पूर्वक मुझे कहा कि मुझे निर्वाचन कार्यालय की तरफ जाना है। मुझे उस गेट पर छोड़ दीजिए जो थोड़ा सा खुला हुआ है। जिस गेट में चैन बंधा हुआ है मैंने उक्त आंखों से दिव्यांग युवक को उस गेट तक छोड़ा । मैंने उस युवक को पूछा कि भाई आपको कलेक्ट्रेट में कोई काम है तो उसने मुझसे कहा कि भाई साहाब मैं यहां रोज अगरबत्ती बेचने आता हूँ। उसके आत्मविश्वास को देखकर मुझे बहुत खुशी हुआ कि भगवान ने उस युवक को आंखे नही दी है लेकिन फिर वह युवक भीख मांगने की बजाय अगरबत्ती बेच के अपना गुजारा कर रहा है।

 

जबकि भगवान ने जिनको पूरे शरीर से सक्षम बनाया है वो इंसान काम नही करने के बहाने खोजते फिरता है। आज मैंने महसूस किया कि अगर आप जिंदगी में सोंचते है कि आप किसी काम को कर सकतें हैं तो आप निश्चित रूप से कर सकते हैं। अगर आप सोंचते हैं कि आप नही कर सकते तो आप कभी नही कर सकते हैं। मुझे उस युवक से मिलने के बाद उसके आत्मविश्वास को देखकर बहुत खुशी हुई।

सचमुच मन के हारे हार है।
मन के जीते जीत । ।

 

Bhupendra kishore vaishnaw

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