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20 वर्षों तक संगठन को खड़ा करने वाले युवा नेता रवि भगत ने बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा, छत्तीसगढ़ की राजनीति में मचा हलचल

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20 वर्षों तक संगठन को खड़ा करने वाले युवा नेता रवि भगत ने बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा, छत्तीसगढ़ की राजनीति में मचा हलचल

रायगढ़/लैलूंगा। भारतीय जनता पार्टी के युवा आदिवासी चेहरों में शामिल और लंबे समय तक संगठन के लिए सक्रिय रहे रवि भगत ने सोशल मीडिया पर अपना इस्तीफा पत्र साझा कर भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देने की घोषणा कर दी है। इस खबर के सामने आते ही छत्तीसगढ़ भाजपा, विशेषकर युवा कार्यकर्ताओं के बीच कई सवाल खड़े हो गए हैं।


रवि भगत का राजनीतिक सफर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से शुरू हुआ। एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने छात्र राजनीति के माध्यम से राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया। वे ABVP के राष्ट्रीय महासचिव और Students For Development (SFD) के राष्ट्रीय प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके हैं। इसके बाद उन्हें भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री तथा बाद में छत्तीसगढ़ भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मिली।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव के साथ मिलकर रवि भगत ने भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ युवाओं को संगठित करने में सक्रिय भूमिका निभाई। वहीं आदिवासी समाज से जुड़े धर्मांतरण और डीलिस्टिंग जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर तक मजबूती से उठाने के कारण भी वे चर्चाओं में रहे। क्रिकेट के माध्यम से बेटियों की प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच देने की उनकी पहल भी काफी सराही गई।
इस्तीफा पत्र में क्या लिखा है?
फेसबुक पर साझा किए गए त्यागपत्र में रवि भगत ने भाजपा मंडल अध्यक्ष, राजपुर को संबोधित करते हुए लिखा है कि—
“मेरे जैसे एक छोटे से गांव के व्यक्ति को भाजपा ने जो सम्मान और पहचान दी, उसके लिए मैं कोटि-कोटि आभारी हूं। किंतु कुछ निजी कारणों से मैं भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ रहा हूं। कृपया मेरे त्यागपत्र को स्वीकार करने की कृपा करें।”
त्यागपत्र की प्रतिलिपि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष को भी भेजी गई है।
कई सवाल खड़े कर रहा इस्तीफा
रवि भगत के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पहले जारी शो-कॉज नोटिस, फिर युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाना, या DMF फंड से क्षेत्र के विकास की मांग जैसे मुद्दों का इस निर्णय से कोई संबंध है, अथवा इसके पीछे कोई अन्य कारण है? फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सरकार बनने के बाद क्या संगठन को रवि भगत जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं की आवश्यकता नहीं रही? यह सवाल भी भाजपा के युवा कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
फिलहाल भाजपा की ओर से रवि भगत के इस्तीफे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, संगठन के लिए दो दशक तक सक्रिय रहे एक युवा आदिवासी नेता का इस्तीफा आने वाले समय में छत्तीसगढ़ भाजपा के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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