नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर और विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 97541 60816 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , दुकान या मॉल में ₹2000 का नोट स्वीकार करने से कोई मना करे तो आप कानूनन क्या कर सकते हैं? – पर्दाफाश

पर्दाफाश

Latest Online Breaking News

दुकान या मॉल में ₹2000 का नोट स्वीकार करने से कोई मना करे तो आप कानूनन क्या कर सकते हैं?

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

दुकान या मॉल में ₹2000 का नोट स्वीकार करने से कोई मना करे तो आप कानूनन क्या कर सकते हैं?

By -Arti vaishnav -Editor in chief

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़े कदम के तहत ₹2000 के करेंसी नोट को इकोनॉमी से वापस लेने का फैसला किया है। हालांकि नोट में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ₹2000 का करेंसी नोट लीगल टेंडर रहेगा।

जिन लोगों के पास ₹2000 के करेंसी नोट हैं, उन्हें चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, वे 30 सितंबर तक ₹2000 के करेंसी नोट को बदल सकते हैं या जमा कर सकते हैं या उपयोग भी कर सकते हैं।

हालाँकि कुछ रिपोर्टों के अनुसार दुकानदार और मॉल ₹2000 के करेंसी नोट को स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं, जो कि मौजूदा कानून के अनुसार अवैध और अस्वीकार्य है।

लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि लेन-देन में समझदारी होनी चाहिए जैसे कि आप ₹10 या ₹100 का सामान खरीदने के लिए ₹2000 के करेंसी नोट नहीं दे सकते।

उपाय क्या है?

अत: यदि कोई दुकानदार ₹ 2000 के करेंसी नोट लेने से इंकार करता है तो उस व्यक्ति या दुकानदार के विरुद्ध शिकायत की जा सकती है तथा दुकानदार को कठोर कानूनी दण्ड दिया जा सकता है।

एनसीआईबी (राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो) के अनुसार भारतीय मुद्रा अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आदेश देने की अवज्ञा) ऐसे व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति देती है। इसके अलावा, सहायता के लिए पुलिस से तुरंत संपर्क किया जा सकता है।

2017 में एक मामला सामने आया था, जिसमें मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के जौरा कस्बे में एक दुकानदार के खिलाफ कथित रूप से 10 रुपये के सिक्के लेने से इनकार करने पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी. खरीदार ने रुमाल खरीदने के लिए 10 रुपये के दो सिक्के पेश किए थे। दुकानदार ने सिक्के लेने से मना कर दिया।

दुकानदार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आदेश की अवज्ञा) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

लाइव कैलेंडर

October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  

You May Have Missed