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Raigarh News : 21 नवंबर तक खुला पंजीयन का पोर्टल, संशोधन के साथ नया पंजीयन भी जारी, किसान पोर्टल में गड़बड़ी अब तक ठीक नहीं…

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Raigarh News : 21 नवंबर तक खुला पंजीयन का पोर्टल, संशोधन के साथ नया पंजीयन भी जारी, किसान पोर्टल में गफलत अब तक ठीक नहीं

 


रायगढ़। एक तरफ कलेक्टर ने रकबा वृद्धि की जांच का आदेश दिया है और दूसरी ओर शासन ने पंजीयन के लिए 21 नवंबर तक सॉफ्टवेयर ओपन कर दिया है। बताया जा रहा है कि किसानों के नए पंजीयन भी होते रहेंगे।
दो सालों से किसान पंजीयन को खिचड़ी बना दिया गया है। गड़बडिय़ों को दुरुस्त करने के बजाय उलझाया जा रहा है। इसका नतीजा है कि समितियों में जबर्दस्त घपले हो रहे हैं। इस बार भी किसान पंजीयन में गलतियों को ठीक नहीं किया जा सका है। कहीं किसान का रकबा जीरो हो गया है तो कहीं गांव ही नहीं दिखा रहा है। ऐसे केसेस ठीक नहीं हो सके हैं। इधर समितियों में रकबे की बेहिसाब बढ़ोतरी ने अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। कलेक्टर ने सभी समितियों के रकबे की जांच कर रिपोर्ट देने कहा है। दूसरी तरफ सरकार ने 21 नवंबर तक पंजीयन ओपन कर दिया है। पंजीयन संशोधन ही किया जा रहा था लेकिन अब नए पंजीयन भी कराए जा सकेंगे। कई किसानों ने धान के बदले दूसरी फसल का पंजीयन नहीं कराया है ताकि वे पूरे रकबे का इस्तेमाल धान में कर सकें। कुल मिलाकर देखा जाए तो इस साल एक और घोटाले की कहानी तैयार की जा चुकी है। अब उसे अंजाम दिया जा रहा है।
क्यों हो रही है गड़बड़ी
किसान पंजीयन में गड़बड़ी करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों को अब तक नहीं बदला जा सका है। जिस समिति में गड़बड़ी होती है वहां जीरो शॉर्टेज करवाकर सारी बातें दबा दी जाती हैं। उठाव के अंतिम दिनों में जमकर लेन-देन होता है। जिन समितियों में सीमा से अधिक शॉर्टेज होता है वहां फर्जी खरीदी का मामला सामने आता है। मतलब बिना धान ले जाए खरीदी। बाद में बाहर से आधी कीमत में धान खरीदकर मिलर को दे दिया जाता है। या फिर उतने धान की कीमत राइस मिलर को दी जाती है।

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