नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर और विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 97541 60816 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , निर्धनता और दरिद्रता में बहुत अंतर है—आचार्य श्री मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज.. – पर्दाफाश

पर्दाफाश

Latest Online Breaking News

निर्धनता और दरिद्रता में बहुत अंतर है—आचार्य श्री मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज..

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

📕 CGNEWS LIVE| खरसिया 📕

निर्धनता और दरिद्रता में बहुत अंतर है—आचार्य श्री मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज

 

सप्तम दिवस की कथा में स्यमन्तक मणि, सुदामा चरित्र सहित अनेक प्रसंगों का हुआ भावपूर्ण वर्णन

खरसिया। अजित सिंह नगर में आयोजित विशाल श्रीमद्भागवत कथा एवं ज्ञान यज्ञ के सप्तम दिवस कथा स्थल पर भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। कथा श्रवण करने के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय जी, माननीय बृजमोहन अग्रवाल जी, सांसद रायपुर लोकसभा एवं पूर्व मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, तथा डॉ. रामप्रताप सिंह, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कथा व्यास आचार्य श्री मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज ने सप्तम दिवस की कथा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और विभिन्न पौराणिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।

सत्य को छिपाया जा सकता है, मिटाया नहीं जा सकता

स्यमन्तक मणि की कथा का वर्णन करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि सत्य को कुछ समय के लिए छिपाया जा सकता है, लेकिन मिटाया नहीं जा सकता। सत्य के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति परेशान हो सकता है, लेकिन उसे पराजित नहीं किया जा सकता।

उन्होंने बताया कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण पर भी स्यमन्तक मणि चोरी करने और प्रसेन की हत्या करने का आरोप लगा था। सत्राजित ने अपनी शंका के आधार पर भगवान श्रीकृष्ण पर आरोप लगाया, लेकिन भगवान ने मणि की खोज कर उसे सत्राजित को सौंपा और स्वयं को निर्दोष सिद्ध किया।

संदेश स्पष्ट है—सत्यमेव जयते।

भगवान श्रीकृष्ण ने मुक्त कराईं 16,100 कन्याएं

कथा में आचार्य श्री ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा भौमासुर के संहार और उसके बंधन से 16,100 कन्याओं को मुक्त कराने का प्रसंग सुनाया। इसके साथ ही ऊषा-अनिरुद्ध विवाह, द्विविद नामक वानर का बलराम जी द्वारा वध तथा भीम और जरासंध के युद्ध एवं जरासंध के जन्म की कथा का भी विस्तार से वर्णन किया।

“निर्धनता और दरिद्रता अलग-अलग हैं”

सुदामा चरित्र के प्रसंग में आचार्य श्री ने कहा कि निर्धनता और दरिद्रता में बहुत अंतर है। सुदामा जी निर्धन हो सकते हैं, लेकिन दरिद्र नहीं।

उन्होंने समझाया कि भगवान अपने भक्तों के साथ धन-दौलत के आधार पर भेदभाव नहीं करते। भगवान के लिए भक्त की आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि उसकी भक्ति, भावना और कर्म महत्वपूर्ण हैं।

सुदामा जी ने भगवान श्रीकृष्ण से कुछ नहीं मांगा। उनके पास जो थोड़ा-सा पोहा था, वही उन्होंने प्रेमपूर्वक भगवान को अर्पित कर दिया। भगवान ने भी सुदामा की भक्ति और भावना को स्वीकार करते हुए उन पर कृपा की।

आचार्य श्री ने कहा कि भक्ति को किसी लाभ के बदले में नहीं करना चाहिए। सच्ची भक्ति निष्काम होती है। मनुष्य को अपने अच्छे कर्म करते रहना चाहिए और फल की चिंता भगवान पर छोड़ देनी चाहिए।

भक्ति में नहीं होता अमीरी-गरीबी का भेद

सुदामा चरित्र के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भगवान के दरबार में कोई अमीर-गरीब नहीं होता। जो व्यक्ति सच्ची श्रद्धा और निष्काम भाव से भगवान का स्मरण करता है, उस पर प्रभु की कृपा अवश्य होती है।

कथा के इस प्रसंग ने पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

भजनों पर झूम उठे श्रद्धालु

कथा के दौरान पूरा पंडाल “राधे-राधे” के जयघोष से गूंज उठा।
“बांके बिहारी लाल तेरी जय होवें…”,
“सुन बरसाने वाली, गुलाम तेरो बनवारी…”,
“आज ब्रज में होली रे रसिया…”,
“लड्डू होली” और फूल होली जैसे सुंदर भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे।

पूरा कथा पंडाल भक्ति, प्रेम और आनंद के रंग में रंगा नजर आया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो ब्रजधाम का उत्सव खरसिया की धरती पर साकार हो उठा हो।

🙏 राधे-राधे | जय श्रीकृष्ण | जय बांके बिहारी लाल 🙏

📕 पर्दाफाश न्यूज 📕

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

लाइव कैलेंडर

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930