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पर्दाफाश

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*शराब माफियाओं को जेल जाने से बचाने इन दो आरक्षको ने लिया ठेका।कोर्ट में दिखाया फर्जी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट, कोर्ट से जेल वारंट कटने के बाद जब कोविड सेंटर भेजा गया तब हुआ भंडाफोड़*

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*शराब माफियाओं को जेल जाने से बचाने इन दो आरक्षको ने लिया ठेका।कोर्ट में दिखाया फर्जी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट, कोर्ट से जेल वारंट कटने के बाद जब कोविड सेंटर भेजा गया तब हुआ भंडाफोड़*

ये क्या हो रहा है छत्तीसगढ़ में?छत्तीसगढ़ पुलिस के सिपाहियों का नया कारनामा सामने आया है। पहले तो शराब तस्करों को पकड़ा। फिर उन्हें जेल जाने से बचाने के लिए कोरोना पॉजिटिव होने की फर्जी रिपोर्ट पेश कर दी। कोर्ट ने आरोपियों को कोविड सेंटर भेजने का आदेश दिया तो मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद दोनों सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं इसमें सहयोगी बने नगर सैनिक मनोज निर्मलकर और टेस्ट सेंटर के कंप्यूटर ऑपरेटर हरजीत सिंह राठौर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

दरअसल, यह सारा मामला कोरबा जिले का है। शहर के मानिकपुर चौकी पुलिस ने शुक्रवार को 47 लीटर महुआ शराब के साथ दो आरोपियों लहुरा यादव और मुकेश सोनी को पकड़ा था। दोनों को लेकर सिपाही दीपनारायण त्रिपाठी व योगेश सिंह कोर्ट पहुंचे। वहां आरोपियों के साथ उनकी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट भी पेश की। शराब ज्यादा थी तो कोर्ट ने आरोपियों को जेल वारंट जारी कर दिया, पर संक्रमित होने से पहले कोविड सेंटर भेजने के आदेश दे दिए।

आरोपियों और उनके परिजनों ने हंगामा किया, तो खुला मामला
कोर्ट के आदेश पर दोनों आरोपियों को कोविड सेंटर ले जाया जाने लगा तो वे हड़बड़ा गए। उन्होंने हंगामा कर दिया और अपने परिजनों को सूचना दी। वे भी पहुंच गए। इसके बाद दोनों सिपाहियों की करतूत का पता चला। इसके बाद SP अभिषेक मीणा ने दोनों सिपाहियों को रविवार को सस्पेंड कर दिया है। वहीं मामले की जांच CSP कोरबा योगेश साहू को सौंप दी है। उन्हें 7 दिन में प्राथमिक रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।

आरोप सही मिले तो सिपाहियों पर दर्ज होगी FIR, दीपनारायण हैं चर्चित आरोपी सिपाहियों में दीपनारायण त्रिपाठी चर्चित है।

उसके खिलाफ पहले भी कई शिकायतें हो चुकी हैं। उसका ट्रांसफर रामपुर चौकी से लेमरू किया गया था। वहां से कुछ माह बाद जुगाड़ कर फिर शहर आ गया। एडिशनल SP कीर्तन राठौर के मुताबिक, प्रथम दृष्टया आरोपियों के कोविड टेस्ट में निगेटिव आने के बाद पता चला है कि सिपाहियों ने उनकी फर्जी रिपोर्ट तैयार करवाई थी। आरोप सही मिले तो दोनों सिपाहियों पर FIR दर्ज की जाएगी।

प्रशासन ने भी SDM को सौंपी जांच, पर 24 घंटे बाद भी कार्रवाई नहीं

दूसरी ओर सरकारी अस्पताल के टेस्ट सेंटर से फर्जी रिपोर्ट जारी करने के मामले में कलेक्टर किरण कौशल ने भी जांच बिठाई है। इसकी जिम्मेदारी SDM कोरबा सुनील नायक को दी गई है। निर्देश में कहा गया है कि फर्जी रिपोर्ट तैयार करने वाले कर्मचारी और अधिकारियों की जानकारी जुटाई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि पुलिस विभाग और अन्य कितने लोगों को इस तरह की फर्जी रिपोर्ट जारी की गई है। हालांकि अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

जांजगीर में आरोपी को जेल भेजने की जगह छोड़ दिया था
इससे पहले जांजगीर में भी मार्च माह में ऐसा ही कुछ मामला सामने आया था। शांतिभंग में जिस आरोपी को कोर्ट ने जेल भेजने का आदेश दिया था, सिपाहियों ने उसे छोड़ दिया। सिपाहियों ने कहा था कि उन्हें लगा कि कोर्ट ने छोड़ने का आदेश दिया है। फिलहाल दोनों सिपाहियों को SP ने लाइन अटैच कर दिया था और मामले की जांच के आदेश दे दिए गए थे।

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