कुनकुनी में उद्योग के नाम पर जमीन खरीदी, वर्षों बाद भी नहीं लगा उद्योग! ग्रामीणों ने उठाई अपनी कृषि भूमि वापस दिलाने की मांग, मंत्री ओपी चौधरी से मिलने की तैयारी..
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कुनकुनी में उद्योग के नाम पर जमीन खरीदी, वर्षों बाद भी नहीं लगा उद्योग!
ग्रामीणों ने उठाई अपनी कृषि भूमि वापस दिलाने की मांग, मंत्री ओपी चौधरी से मिलने की तैयारी

खरसिया। खरसिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कुनकुनी में उद्योग लगाने के उद्देश्य से ग्रामीणों की जमीन खरीदे जाने के बाद वर्षों बीतने के बावजूद प्रस्तावित औद्योगिक गतिविधियां शुरू नहीं होने का मामला अब फिर चर्चा में है। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 15 वर्ष पहले उद्योग लगाने और रोजगार उपलब्ध कराने की बात कहकर उनकी कृषि भूमि खरीदी गई थी, लेकिन आज तक न तो अपेक्षित उद्योग स्थापित हुआ और न ही प्रभावित ग्रामीणों को रोजगार का लाभ मिला।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिस्थितियों और उद्देश्य को सामने रखकर जमीन की खरीदी की गई थी, उसकी अब प्रशासनिक स्तर पर जांच होनी चाहिए। ग्रामीण अपनी जमीन की वर्तमान स्थिति, स्वामित्व, उपयोग तथा उद्योग स्थापना से संबंधित शर्तों की जानकारी सामने लाने की मांग कर रहे हैं।
जमीन खरीदी को लेकर भी उठ रहे सवाल
ग्रामीणों के बीच यह आरोप भी चर्चा में है कि स्थानीय गुड़ाखू व्यवसायी स्व. मुरलीधर अग्रवाल द्वारा प्रस्तावित उद्योग के लिए कुछ ग्रामीणों की जमीन कथित तौर पर कम कीमत पर खरीदी गई थी। ग्रामीणों का दावा है कि इनमें से कुछ जमीन उनके स्वयं तथा उनके स्व. पुत्र आलोक अग्रवाल के नाम से खरीदी गई थी।
बाद में जमीन के आपसी लेन-देन एवं अन्य विवादों के चलते मामला उलझता चला गया और ग्रामीणों के अनुसार न तो प्रस्तावित उद्योग स्थापित हो सका और न ही किसानों को उनकी जमीन वापस मिली।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
अब जमीन वापसी के लिए लामबंद हो रहे ग्रामीण
लंबे समय से लंबित इस मामले को लेकर अब कुनकुनी के ग्रामीणों ने एकजुट होना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण, डायवर्सन, भूमि उपयोग, उद्योग स्थापना से संबंधित अनुमति तथा शासन से हुए किसी समझौते/आश्वासन की जांच कराई जाए।
ग्रामीण जल्द ही छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री ओपी चौधरी से मुलाकात कर अपनी कृषि भूमि वापस दिलाने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग रखने की तैयारी में हैं।
जांच के बाद सामने आ सकता है पूरा सच
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि जमीन वास्तव में किसी औद्योगिक परियोजना के उद्देश्य से खरीदी गई थी, तो उस परियोजना की वर्तमान स्थिति क्या है? जमीन का वर्तमान उपयोग क्या है? किसानों से जमीन खरीदने के समय क्या शर्तें तय हुई थीं? और क्या उन शर्तों का पालन हुआ?
इन सभी बिंदुओं पर राजस्व विभाग, उद्योग विभाग और संबंधित स्थानीय प्रशासन के रिकॉर्ड की जांच होने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि वे अब अपनी कृषि भूमि की स्थिति स्पष्ट कराने और नियमानुसार जमीन वापसी के लिए कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।
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