12 लाख की कार, 5 लाख की कथित धोखाधड़ी और विधवा के न्याय की गुहार…
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12 लाख की कार, 5 लाख की कथित धोखाधड़ी और विधवा के न्याय की गुहार

भागवत कथा वाचक के ट्रस्ट से 5 लाख की कथित ठगी का आरोप, मृतक के नाम फाइनेंस वाहन झांसी पहुंचने पर भी उठे सवाल

खरसिया/छाल। बरभौना निवासी स्व. टेकचंद्र डनसेना से जुड़े एक मामले में कथित धोखाधड़ी और दस्तावेजों के दुरुपयोग को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। मृतक के नाम से करीब 12 लाख रुपये की कार फाइनेंस होने, उसके झांसी, उत्तर प्रदेश पहुंचने तथा बाद में कथित रूप से वापस छत्तीसगढ़ लाए जाने को लेकर परिजन लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।
इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में भागवत कथा वाचक हरिशंकर शर्मा जी महाराज ने अपने ट्रस्ट के 5 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगाए जाने की बात कही है। बताया जा रहा है कि मामले में शिकायत के बाद महाराज ने धोखाधड़ी की FIR दर्ज कराने की तैयारी की थी। हालांकि, कथित आरोपी पक्ष की ओर से राशि शीघ्र वापस करने का आग्रह किए जाने के बाद फिलहाल FIR दर्ज नहीं कराने की बात सामने आई है।
महाराज के ट्रस्ट के नाम वाहन का इकरारनामा कैसे?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि वाहन स्व. टेकचंद्र डनसेना के नाम से फाइनेंस हुआ था, तो वह वाहन झांसी, उत्तर प्रदेश में भागवत कथा वाचक के ट्रस्ट तक किस प्रक्रिया के माध्यम से पहुंचा?
वाहन को ट्रस्ट के नाम इकरारनामा किए जाने की प्रक्रिया में किस-किस व्यक्ति की भूमिका रही, दस्तावेज किस आधार पर तैयार हुए और वाहन का वास्तविक स्वामित्व किसका था—इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
परिजनों का आरोप है कि कानूनी विवाद सामने आने के बाद यदि वाहन छत्तीसगढ़ वापस लाया गया, तो उसे मृतक की पत्नी जमुना बाई डनसेना को अब तक क्यों नहीं सौंपा गया?
तीन महीने से न्याय की गुहार
मृतक की पत्नी जमुना बाई डनसेना का कहना है कि वह पिछले करीब तीन महीने से न्याय के लिए पुलिस और संबंधित अधिकारियों के चक्कर लगा रही हैं। उनका आरोप है कि उन्हें अब तक उचित न्याय नहीं मिल पाया है।
पीड़िता ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताते हुए रायगढ़ लोकसभा सांसद से लिखित शिकायत कर न्याय एवं सुरक्षा की गुहार लगाई है।
फाइनेंस और बीमा दस्तावेजों पर भी सवाल
मामले में चोला मंडलम एवं केनरा बैंक से जुड़े अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि मृतक के नाम से खरसिया के गंज पीछे सिंधी कॉलोनी का कथित गलत पता इस्तेमाल कर वाहन फाइनेंस कराया गया।
इसके अलावा एक अन्य गंभीर आरोप यह भी है कि पायल अग्रवाल नामक युवती को दस्तावेजों में स्व. टेकचंद्र डनसेना की पत्नी बताकर वाहन का बीमा क्लेम लेने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार दस्तावेज में पायल अग्रवाल का पता वार्ड क्रमांक 15, गंज पीछे, सिंधी कॉलोनी, खरसिया बताया गया है, जबकि स्थानीय स्तर पर वार्ड क्रमांक 15 को संजय नगर के रूप में बताए जाने का दावा किया जा रहा है।
इन सभी दस्तावेजों की वास्तविकता और उनके आधार पर हुए लेन-देन की पुष्टि पुलिस जांच एवं संबंधित संस्थाओं के रिकॉर्ड से ही हो सकती है।
प्रधान आरक्षक पर भी आरोप
पीड़िता की ओर से छाल थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक अशोक देवांगन पर भी धमकी देने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्हें कथित तौर पर धारा 155 के तहत कार्रवाई/फरमान की धमकी दी गई।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। यदि पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं तो पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
कई सवाल अब भी अनुत्तरित
इस पूरे प्रकरण में कई सवाल जांच की मांग कर रहे हैं—
🔹 मृतक के नाम से करीब 12 लाख रुपये की कार किस आधार पर फाइनेंस हुई?
🔹 फाइनेंस दस्तावेजों में दर्ज पता वास्तविक था या नहीं?
🔹 वाहन झांसी उत्तर प्रदेश तक कैसे पहुंचा?
🔹 वाहन का ट्रस्ट के नाम इकरारनामा किस आधार पर हुआ?
🔹 वाहन वापस छत्तीसगढ़ आने के बाद मृतक की पत्नी को क्यों नहीं सौंपा गया?
🔹 5 लाख रुपये की कथित ट्रस्ट राशि का मामला क्या है?
🔹 पायल अग्रवाल को मृतक की पत्नी बताए जाने का आधार क्या था?
🔹 कथित बीमा क्लेम की प्रक्रिया में किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ?
🔹 फाइनेंस एवं बीमा कंपनियों के अधिकारियों ने दस्तावेजों का सत्यापन किस प्रकार किया?
🔹 पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की?
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