रायगढ़ कार्बन प्लांट हादसा: आग में झुलसी 9 महीने की मासूम की मौत, कई मजदूरों की हालत गंभीर-अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल..
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रायगढ़ कार्बन प्लांट हादसा: आग में झुलसी 9 महीने की मासूम की मौत, कई मजदूरों की हालत गंभीर-अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

📕औद्योगिक सुरक्षा विभाग एवं श्रम विभाग की भूमिका पर उठे सवाल…??
कहने कों तो मजदूरों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उक्त संस्थानों की स्थापना की गई है। लेकिन सही माने तो इन सरकारी विभागों के अधिकारीयों एवं कर्मचारियों कों आम जनता के काम से कोई लेनादेना नही है। सिर्फ वसूली एवं खाना पूर्ति करते हुये सरकार की छबि धूमिल करने मे लगे है।
आखिर इन आदिवासी मजदूरों एवं मासूम बच्चोँ का क्या दोष था वर्षो से चल रहें उक्त उद्योग कों आखिर लायसेंस किसने दिया। सुरक्षा मानको का कोई ध्यान क्यों नही दिया गया। दोषी अधिकारियो एवं जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जावे।
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में मंगल कार्बन प्लांट में हुए हादसे में नौ महीने की बच्ची भूमि खड़िया ने दम तोड़ दिया।
बच्ची अपनी मां के साथ प्लांट में थी। उसे और अन्य झुलसे मजदूरों को रायपुर के निजी बर्न्स एंड प्लास्टिक सर्जरी सेंटर में भर्ती कराया गया था। आज शव का पोस्टमॉर्टम होगा।
हादसे में एक ही परिवार के चार सदस्य गंभीर रूप से झुलसे। साहेब लाल खड़िया (46) और शिव खड़िया (27) 80-90% तक झुलसे, जबकि उदासिनी खड़िया (25) 30-40% और भूमि (9 माह) 80-90% झुलस गई थी।
इसके अलावा कौशल पटेल 70-80%, इंदीवर 80-90% और प्रिया सारथी 70-80% झुलसी हैं। सभी का इलाज वेंटिलेटर सपोर्ट पर जारी है।
यह हादसा 5 फरवरी को खरसिया थाना क्षेत्र के बानीपाथर स्थित प्लांट में हुआ। पुराने टायर पिघलाकर काला तेल निकालने के दौरान फर्नेस खोलते ही तेज आग का प्रेशर बाहर निकला, जिससे पास में काम कर रहे आठ मजदूर आग की चपेट में आ गए। आरोप है कि फर्नेस को ठंडा किए बिना खोला गया और मजदूरों को सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए।
हादसे के बाद परिजनों ने प्लांट प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। लेकिन परिवार का आरोप है कि प्रबंधन उन्हें दबाव डालकर शिकायत वापस लेने और बयान बदलने के लिए मजबूर कर रहा है।
पीड़ित परिवारों की मांग है कि मृत बच्ची के परिजनों को उचित मुआवजा मिले और सभी घायलों का इलाज प्लांट प्रबंधन से कराया जाए। इसके अलावा FIR वापस लेने के दबाव की निष्पक्ष जांच हो और दोषी प्रबंधन व जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्लांट प्रबंधन और जिला प्रशासन से सुरक्षा मानकों को लागू करने और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए कड़ा कदम उठाने की अपील की जा रही है। यह हादसा औद्योगिक सुरक्षा की अनदेखी और मजदूरों की सुरक्षा की अनिवार्यता को दोबारा सामने ला दिया है।
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