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छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध हास्य कवि और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. सुरेंद्र दुबे जी का गुरुवार, 26 जून 2025 को निधन हो गया । वे 72 वर्ष के थे।आज पंचतत्व में हुए विलीन

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छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध हास्य कवि और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. सुरेंद्र दुबे जी का गुरुवार, 26 जून 2025 को निधन हो गया । वे 72 वर्ष के थे।आज पंचतत्व में हुए विलीन

* निधन का कारण: डॉ. सुरेंद्र दुबे का निधन दिल का दौरा पड़ने के कारण हुआ। उन्हें बुधवार देर रात दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उन्हें रायपुर के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) में भर्ती कराया गया था। गुरुवार दोपहर को इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

* अंतिम संस्कार: उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को रायपुर के मारवाड़ी श्मशान घाट पर किया गया, जिसमें प्रख्यात कवि कुमार विश्वास सहित कई साहित्यकार और राजनेता शामिल हुए।

* एक युग का अंत: डॉ. सुरेंद्र दुबे को “शब्दों का जादूगर” छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध हास्य कवि और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. सुरेंद्र दुबे जी का गुरुवार, 26 जून 2025 को निधन हो गया । वे 72 वर्ष के थे।आज पंचतत्व में हुए विलीन
और “ब्लैक डायमंड” के नाम से भी जाना जाता था। उन्होंने अपनी हास्य कविताओं और व्यंग्य से देशभर में लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाई थी। उनकी प्रसिद्ध पंक्ति ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ को उन्होंने विश्वभर के मंचों पर प्रचारित किया।

* योगदान और सम्मान: डॉ. दुबे पेशे से एक आयुर्वेदाचार्य थे, लेकिन उनका असली परिचय एक कवि, व्यंग्यकार और समाजचिंतक के रूप में रहा। वे देश के एकमात्र हास्य-व्यंग्य कवि थे जिन्होंने सबसे ज्यादा बार ऐतिहासिक लाल किले और 25 से अधिक देशों में काव्य पाठ किया। भारत सरकार ने उन्हें 2010 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया था। उन्हें 2008 में काका हाथरसी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

* शोक की लहर: उनके निधन से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के साहित्यिक और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, कवि कुमार विश्वास और अन्य नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे का निधन साहित्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
* विरासत: डॉ. सुरेंद्र दुबे अपने पीछे हंसी और शब्दों की एक अमूल्य विरासत छोड़ गए हैं, जो हमेशा लोगों को प्रेरित करती रहेगी।
यह वाकई साहित्य जगत के लिए एक बड़ी क्षति है।

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