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पर्दाफाश

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रायगढ़ — बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, अभियान के लिए देश में सम्मानित होने वाले रायगढ़ जिले में ही नहीं हैं बेटियां सुरक्षित-

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रायगढ़ -खरसिया बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, अभियान के लिए सम्मानित होने वाले जिले में ही नहीं हैं बेटियां सुरक्षित-

खरसिया नगर के गंज पीछे के स्कुल में शिक्षक मासूम बच्चीयों के साथ करता हैं अश्लील हरकतें.

प्राचार्य ने कहा कई बार समझाइस दे चूके, अभिभावकों और स्कुल प्रबंधन कि बैठक में स्वीकार कर चूका हैं शिक्षक गलती.

नाबालिग बेटियों कि अस्मत से खेलने वाले शिक्षक पर अति संवेदनशील मामले में 72 घंटे बाद भीं fir दर्ज नहीं बाद में आना कहकर चलता कर दिया चौकी प्रभारी ने.

खरसिया -स्कुल मे छोटी छोटी बच्चीयों के साथ अश्लील हरकत करने वाले आरोपी शिक्षक पर खरसिया पुलिस कार्यवाही नहीं कर रही,1 नहीं 2 नहीं 5-6 बच्चीयों के साथ गंदी हरकते सालों से करते आने का आरोप है इस शिक्षक, लोकलज के भय से पीड़ित परिवारों के द्वारा शिकायत नहीं की जाती थी स्वयं प्राचार्य ने बताया की इन्हे कई बार समझाइस दी गई है पीड़ित परिवारों ने चौकी जाकर शिकायत दर्ज करवाना चाहा, लेकिन उनकी शिकायत पर fir दर्ज नहीं हुआ है. जिन्हे क़ानून का थोड़ा भी ज्ञान होगा उन्हें यह पता होगा की ऐसे संवेदनशील मामलो मे तत्काल fir का आदेश सुप्रीम कोर्ट से है, क़ानून मे है, चुंकि सभी बच्चीयां नाबालिक हैं, उसी स्कुल मे वे रोज पढ़ने जाती हैं, चूँकि शिक्ष क ने स्वयं अपनी गलती स्वीकार किया स्कुल मे ज़ब अभिभावकों द्वारा पुरे घटनाक्रम को बताया गया तब आगे से ऐसा नहीं होगा कहने के पुनः अन्य बच्चीयों के साथ अश्लील हरकतों को दोहराया गया है तब परिजनों द्वारा मजबूर होकर खरसिया चौकी मे शिकायत का मन बनाया गया.

पीड़ित बच्चीयों के परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार चौकी प्रभारी द्वारा 72 घंटे से अधिक समय हो जाने के बाद भी शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है उलटे शिक्षक को सभी को मैनेज़ करने के लिए प्रयास करने कहा जा रहा, हमारे पास भीं सम्पर्क किया और सबको मैनेज़ कर लेने की बात कही, स्कूली छात्राओं के साथ हुई ये हरकतें बेहद शर्मनाक है, जिस खरसिया नगरपालिका मे महिला नगरपालिका अध्यक्ष है, और जिस वार्ड की वह जनप्रतिनिधि पार्षद है उसी वार्ड की घटना बताई जा रही है, खरसिया मे महिला sdop हैं जो पुलिस अधिकारी है उस नगर मे बालिकाओं के साथ ऐसी हरकते हो रही है जनप्रतिनिधि सहित प्रशासन मौन है बाद मे आना बोलकर परिजनों को चौकी से चलता कर दिया जाता है!

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के लिए सम्मानित होते आया है बेटियों को यह अभियान रायगढ़ जिले से ही प्रारम्भ होकर पुरे देश मे युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है, बेटियां शिक्षा के मंदिर मे भीं सुरक्षित नहीं है, क्या यह नारा चरितार्थ हो रहा है ऐसी घटनाओ को देखने सुनने पर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, के सुंदर नारे को क्या हम ऐसी घटनाओ को सुनने पढ़ने देखने के बाद भीं जोर शोर से नारे लगाने के लायक रहेंगे? क्या अब बेटियां इन घटनाओ से बचने के लिए स्कुल ही जाना छोड़ दें? आखिर मासूम बच्चीयां क्यों झूठ बोलेंगी अपने घर जाकर उनको क्या लाभ होगा इससे? ऐसे गंभीर मामलो पर बेटियों के परिजनों को कितनी मानसिक परेशानियों से विवशता मजबूरियों से गुजरना पड़ता है, लोकलज का भय बच्चीयों का भविष्य थाना पुलिस कोर्ट का चक़्कर इन सबसे गुजरना पड़ता है तो अभिभावकों को इससे क्या फायदा हो सकता है,? बदनामी होंगी कहकर चुप कर बैठाने की तैयारियां चल रही है, नगर और स्कुल की बदनामी शिक्षक के करतूत से हो रही है या उस करतूत की शिकायत से fir दर्ज नहीं करने वाले नौकरशाह, जनप्रतिनिधि, प्रशासन अन्य आमजन पहले यही तय कर ले, घृणित कार्य बच्चीयों के अस्मत से खेलने वाला गलत है या उस कृत्य की शिकायत कानूनी तरिके से करने वाले परिजन पीड़ित परिवार गलत है

आरोपी  शिक्षक अजय ओगरे

जिला , शिक्षा अधिकारी ने जाँच के आदेश दिए है जाँच निष्पक्ष कैसे होगी ज़ब आरोपी स्वतंत्र होकर सबको मैनेज़ करने की बात कर रहा है वर्षो से हरकतों को सहने और देखने वाले स्कुल के प्राचार्य को स्वयं शिकायत दर्ज करवानी चाहिए थी इस मामले पर बदनामी की बात कहकर पल्ला झाड़ना मतलब एक दिन बड़ी घटना को न्योता देना होगा. अब देखना यह है कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ वाले जिले मे मासूम बेटियों को बचाया जाता है या उन्हें बदनामी लोकलज के भय या दबाव बनाकर उन्हें सहन करने मामले को भूलने के लिए छोड़ा जाता है, ज़ब कोई बड़ी घटना हो जाएगी तब इनकी आँखे खुलेंगी. फिलहाल बेटियों को बचाने के लिए जो जवाबदार और जिम्मेदार लोग हैं वो पहले जाँच करवा रहे हैं क्योंकि हरकत करने वाला शिक्षक है परिजनो , स्कुल प्रबंधन, चौकी थाना स्थानीय प्रशासन से खुद को बचाने के लिए भरपूर दबाव बनाने कि सुचना है. हो सकता है शिक्षक ने जैसा कि कल कहा था सबको मैनेज़ कर लिया हूं, मैनेज़ हो भीं जाये सब के सब फिर भीं अब ये बड़ा सवाल है यहाँ कि ऐसे कैसे बचेंगी बेटियां ज़ब शिक्षा के मंदिर मे ही वो नहीं है सुरक्षित??क्या हमारी बेटियों के साथ ऐसी घटनायें सभ्य समाज के लिए.

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