खरसिया तहसील में कोटवारी भूमि के कथित क्रय-विक्रय का मामला, राजस्व व्यवस्था पर उठे सवाल
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खरसिया तहसील में कोटवारी भूमि के कथित क्रय-विक्रय का मामला, राजस्व व्यवस्था पर उठे सवाल

खरसिया। खरसिया तहसील क्षेत्र में कोटवारी भूमि के कथित क्रय-विक्रय और कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग को लेकर एक बार फिर राजस्व व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि राजस्व अधिकारियों के समक्ष शिकायतें पहुंचने तथा पटवारी स्तर पर भूमि संबंधी जानकारी होने के बावजूद कुछ स्थानों पर शासकीय एवं अहस्तांतरणीय प्रकृति की भूमि का उपयोग कथित रूप से निजी प्लाटिंग के लिए किया जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा कृषि भूमि को छोटे-छोटे भूखंडों में बांटकर बेचने के साथ-साथ कोटवारी भूमि का भी स्टाम्प के माध्यम से कथित क्रय-विक्रय किया जा रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे न केवल राजस्व नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आ सकता है, बल्कि शासन को राजस्व हानि की भी आशंका है।
इसी कड़ी में ग्राम तेलिकोट की कोटवारी भूमि को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि कोटवार रामदास महंत, पिता श्याम लाल महंत से संबंधित वनाचल केयर हॉस्पिटल के पीछे स्थित भूमि के बड़े हिस्से का कथित रूप से दलालों के माध्यम से क्रय-विक्रय किया गया है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
मामले में अब यह जांच का विषय है कि संबंधित भूमि का वास्तविक खसरा नंबर, रकबा, भूमि की प्रकृति, स्वामित्व एवं हस्तांतरण की वैधानिक स्थिति क्या है तथा यदि किसी प्रकार का विक्रय हुआ है तो वह किन दस्तावेजों के आधार पर किया गया।
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि राजस्व विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कोटवारी भूमि के रिकॉर्ड, स्टाम्प पर हुए कथित लेन-देन, संबंधित रजिस्ट्री/दस्तावेज तथा भूमि उपयोग की जांच करे। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं और यदि हुआ है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं।
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सवाल यह है—शिकायतों और राजस्व रिकॉर्ड की जानकारी के बावजूद कथित लेन-देन पर कार्रवाई कब होगी?
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