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गर्मी में कोट पहनने की अनिवार्यता पर वकील को नहीं मिली राहत, SC ने दी ये सलाह

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गर्मी में कोट पहनने की अनिवार्यता पर वकील को नहीं मिली राहत, SC ने दी ये सलाह

याचिकाकर्ता ने कहा कि काला कोट और गाउन औपनिवेशिक काल से चले आ रहे हैं. यह सही है कि इसके पीछे उद्देश्य वकालत के व्यवसाय और कोर्ट की गरिमा को बनाए रखना था लेकिन व्यवहारिक पहलुओं को देखा जाना चाहिए.

: गर्मी के दिनों में वकीलों के लिए काला कोट और गाउन पहनना अनिवार्य न रखने की मांग पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मना कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह वकीलों के ड्रेस कोड समेत दूसरे नियमों को तय करने वाली संस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया (Bar Council Of India) में अपनी बात रखे.

याचिकाकर्ता शैलेंद्र त्रिपाठी ने कहा था कि काला कोट और गाउन औपनिवेशिक काल से चले आ रहे हैं. यह सही है कि इसके पीछे उद्देश्य वकालत के व्यवसाय और कोर्ट की गरिमा को बनाए रखना है. लेकिन व्यवहारिक पहलुओं को भी देखा जाना चाहिए.

 

Supreme Court On Dress Code: गर्मी के दिनों में वकीलों के लिए काला कोट और गाउन पहनना अनिवार्य न रखने की मांग पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मना कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह वकीलों के ड्रेस कोड समेत दूसरे नियमों को तय करने वाली संस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया (Bar Council Of India) में अपनी बात रखे.

याचिकाकर्ता शैलेंद्र त्रिपाठी ने कहा था कि काला कोट और गाउन औपनिवेशिक काल से चले आ रहे हैं. यह सही है कि इसके पीछे उद्देश्य वकालत के व्यवसाय और कोर्ट की गरिमा को बनाए रखना है. लेकिन व्यवहारिक पहलुओं को भी देखा जाना चाहिए.

गर्मी में ड्रेस कोड का पालन कष्टदायक
भारत के अधिकतर हिस्सों में पड़ने वाली भीषण गर्मी में इस ड्रेस कोड का पालन कष्टदायक है. साथ ही, नए और आर्थिक रूप से कम सक्षम वकीलों के लिए इस तरह की पोशाक का प्रबंध कठिन होता है. मामला जस्टिस इंदिरा बनर्जी और वी रामासुब्रमन्यम की बेंच में लगा.

याचिका पर क्या बोली पीठ?
जस्टिस बनर्जी ने याचिकाकर्ता से सहानुभूति जताते हुए कहा कि वह कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) और मद्रास हाई कोर्ट में जज रह चुकी हैं. दोनों ही जगह समुद्र के किनारे है. वहां मौसम गर्म और उमस भरा है. बेंच ने याचिकाकर्ता के लिए पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह से कहा कि यह विषय सीधे सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई का नहीं है. आपको बार काउंसिल ऑफ इंडिया (Bar Council Of India) को ज्ञापन देना चाहिए. कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली.

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