नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर और विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 97541 60816 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , गाय के साथ पशु , आवारा और लावारिस शब्दों का प्रयोग ना करें – अरविन्द तिवारी… – पर्दाफाश

पर्दाफाश

Latest Online Breaking News

गाय के साथ पशु , आवारा और लावारिस शब्दों का प्रयोग ना करें – अरविन्द तिवारी…

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

गाय के साथ पशु , आवारा और लावारिस शब्दों का प्रयोग ना करें – अरविन्द तिवारी

संजीव शर्मा की रिपोर्ट

रायपुर – भारतीय संस्कृति में गाय को हमारे जीवन का अभिन्न अंग माना गया है। हमारे प्राचीन धर्मग्रंथों में गाय को पूजनीय मानकर हर पर्व और उत्सव पर गाय की पूजा की परंपरा को महत्व दिया गया है। हमारे पूर्वज गाय के अंदर विद्यमान उन तत्वों से परिचित थे जिनकी खोज इस युग में वैज्ञानिक कर रहे हैं।
उक्त बातें राष्ट्रीय गो सेवा संगठन कामधेनु सेना छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष अरविन्द तिवारी ने गोभक्तों को आज गोपाष्टमी के पावन अवसर पर संबोधित करते हुये कही। प्रदेशाध्यक्ष ने गाय की महत्ता पर प्रकाश डालते हुये कहा कि गाय धर्म की मूल है , उसके बिना कोई सद्कर्म और शुभकर्म नही हो सकती। “गवां अंगेषु तिष्ठन्ति भुवनानि चतुर्दश”- गाय के शरीर में चौदह लोक विराजते हैं।
तुष्टास्तु गाव: शमयन्ति पापं , दत्तास्तु गावस् त्रिदिवं नयन्ति।
संरक्षिताश्च उपनयन्ति वित्तं , गोभिर्न तुल्यं धनमस्ति किंचित।।
— प्रसन्न होने पर गायें सारे पाप , ताप को धो डालती हैं और दान देने पर सीधे स्वर्ग लोक को ले जाती है , विधिपूर्वक पालन करने पर धन , वैभव , समृद्धि का रूप धारण कर लेती है , गायों के समान संसार में कोई भी सम्पत्ति या समृद्धि नही है।जब कोई चीज वर्णशंकर बन जाती है तो उसका प्रभाव समाप्त हो जाता है इसलिये विदेशियों ने गाय को वर्णशंकर बना दिया। जब से हमने गौमाता का तिरस्कार किया है तब से वह अपने सारी शक्तियों को छिपा दी है। आज भी अगर उन्हें कोई वशिष्ठ , जमदग्नि जैसा गौपुत्र मिल जाये तो वह अपनी सारी शक्ति प्रकट कर देगी। भारतीयों ने जब से गौमाता की उपेक्षा की तभी से भारत की दुर्दशा का प्रारंभ हुआ है। ” गोसेवा सम पुण्य ना कोई” – गो सेवा के समान कोई पुण्य नही है। ये इहलोक और परलोक में भी हमारा उपकार करती है , पृथ्वी के सप्त आधारभूत स्तम्भों में गाय प्रमुख स्तम्भ है। गौमाता के गोमय , गोमूत्र सहित उनके श्वास , प्रश्वास में भी असुरत्व को नष्ट करने की शक्ति है। सर्वदेवमयी गौमाता चैतन्य , प्रेम , करूणा ,त्याग , संतोष ,सहिष्णुता आदि दिव्यगुणों से परिपूर्ण है। गाय के रोम रोम में सात्विक विकिरण विद्यमान है रहती है , इससे मनुष्य को धर्म , अर्थ , काम , मोक्ष चारों पुरूषार्थों की प्राप्ति होती है। बड़े दुख की बात है कि समस्त धर्मों , पुण्यों , सुख संपत्ति के भंडार एवं समस्त फलदायिनी गौमाता का वर्तमान में घोर तिरस्कार हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप देश में ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व में रक्तपात , हिंसा , और उपद्रव आदि की भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्राचीन परंपरा में धर्म के बिना राजनीति विधवा मानी गई है परंतु वर्तमान राजनीति में धर्म का कोई स्थान नहीं है। आज विश्व के सभी शासनतंत्र धर्म के वास्तविक स्वरूपों को ना समझ कर दिशाहीन होकर जनभावनाओं के साथ जनता का और स्वयं का अहित कर रहे हैं। नि:संदेह इसमें विश्वरूप धर्म और विश्वधारणी गौ माता की उपेक्षा के साथ-साथ समस्त देवी देवताओं के प्रति अश्रद्धा का भाव ही प्रधान कारण है। अंत में अरविन्द तिवारी ने सभी से मार्मिक अपील की है कि गौमाता के साथ पशु , आवारा और लावारिस जैसे शब्दों का प्रयोग ना करें। गाय तो भगवानों के भी भगवान हैं।

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

लाइव कैलेंडर

July 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031