📕 पर्दाफाश न्यूज | EXPOSE 📕 अग्रवाल गुड़ाखु फैक्ट्री के मुंशी से शोभा राइस मिल के डायरेक्टर तक! 1993 से डायरेक्टर होने का दस्तावेजी रिकॉर्ड, फिर भी ₹15–17 हजार की नौकरी.?
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📕 पर्दाफाश न्यूज | EXPOSE 📕
अग्रवाल गुड़ाखु फैक्ट्री के मुंशी से शोभा राइस मिल के डायरेक्टर तक!
1993 से डायरेक्टर होने का दस्तावेजी रिकॉर्ड, फिर भी ₹15–17 हजार की नौकरी?
खरसिया की शोभा राइस मिल प्राइवेट लिमिटेड को लेकर एक बड़ा सवाल सामने आया है।
CRISIL की 19 दिसंबर 2016 की रेटिंग रिपोर्ट में दर्ज है कि Shobha Rice Mill Private Limited वर्ष 1993 में स्थापित हुई थी और कंपनी के निदेशकों में मुरलीधर अग्रवाल एवं हरप्रसाद राठौर के नाम शामिल थे। रिपोर्ट में हरप्रसाद राठौर को कंपनी के operations संभालने वाला व्यक्ति भी बताया गया है।
यानी उपलब्ध दस्तावेज यह जरूर बताते हैं कि हरप्रसाद राठौर कंपनी के निदेशक थे और कंपनी वर्ष 1993 से अस्तित्व में है।
अब सवाल इससे भी बड़ा है…
🔴 क्या हरप्रसाद राठौर के पास कंपनी के शेयर भी हैं?
🔴 यदि शेयर हैं तो उनकी कितनी हिस्सेदारी है?
🔴 वर्ष-दर-वर्ष उन्हें कितना लाभांश मिला?
🔴 निदेशक के रूप में उन्हें कोई remuneration/director fee मिली या नहीं?
🔴 यदि वे कंपनी के operations संभालते थे तो उनका वास्तविक पारिश्रमिक कितना था?
🔴 दूसरी ओर यदि वे आज भी अग्रवाल गुड़ाखु फैक्ट्री में करीब ₹15–17 हजार मासिक वेतन पर काम कर रहे हैं, तो 1993 से कंपनी के साथ जुड़े व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
एक और सवाल—जिम्मेदारी किसकी और लाभ किसका?
राइस मिल के कामकाज के साथ-साथ यदि कैश, कानूनी मामलों और अन्य जिम्मेदारियां भी हरप्रसाद राठौर संभालते रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि इन जिम्मेदारियों के बदले उन्हें वास्तविक आर्थिक लाभ क्या मिला?
सरकारी OCMMS रिकॉर्ड में भी SHOBHA RICE MILL PVT LTD, Village Bhelwadih, Post Kharsia, District Raigarh का रिकॉर्ड मौजूद है।
अब पर्दाफाश न्यूज के 5 बड़े सवाल
❓ 1993 से आज तक हरप्रसाद राठौर की शेयरहोल्डिंग कितनी रही?
❓ उन्हें अब तक कुल कितना लाभांश मिला?
❓ कंपनी ने उन्हें निदेशक के रूप में कितना पारिश्रमिक दिया?
❓ क्या वे वास्तव में मालिकाना हिस्सेदारी वाले निदेशक हैं या केवल प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले निदेशक?
❓ 30 से अधिक वर्षों की सेवा के बाद भी क्या ₹15–17 हजार की नौकरी ही उनकी आर्थिक हिस्सेदारी है?
📌 यह मामला आरोप लगाने से ज्यादा दस्तावेजों की जांच का है।
पर्दाफाश न्यूज अब कंपनी के MCA रिकॉर्ड, निदेशक विवरण, शेयरहोल्डिंग, वार्षिक रिटर्न और वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि हरप्रसाद राठौर की वास्तविक हिस्सेदारी और आर्थिक लाभ कितना रहा है।
📕 पर्दाफाश न्यूज — अब उठेगा हर घोटाले से पर्दा, होगा पर्दाफाश।
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