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पर्दाफाश

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खरसिया में अवैध प्लाटिंग और पीएम आवास को लेकर उठे सवाल कलेक्टर के निर्देश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप, तालाब पार की जमीनों पर निर्माण की अनुमति और पीएम आवास स्वीकृति जांच के घेरे में…

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खरसिया में अवैध प्लाटिंग और पीएम आवास को लेकर उठे सवाल

कलेक्टर के निर्देश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप, तालाब पार की जमीनों पर निर्माण की अनुमति और पीएम आवास स्वीकृति जांच के घेरे में

खरसिया। खरसिया शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में कथित अवैध प्लाटिंग को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर निर्देश दिए जाने के बावजूद कई स्थानों पर प्लाटिंग का काम जारी है। इसका खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई लगाकर इन क्षेत्रों में जमीन या मकान खरीदे हैं और बाद में सड़क, नाली, बिजली तथा पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

इसी बीच शहरी क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बड़ी संख्या में स्वीकृतियों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कथित अवैध प्लाटिंग अथवा विवादित भूमि पर बने मकानों को योजना का लाभ मिलने की स्थिति की जांच आवश्यक है। उनका आरोप है कि नगर पालिका के आवास विभाग से जुड़े कुछ कर्मचारियों पर हितग्राहियों से अवैध राशि वसूलने के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

तालाब पार की जमीनों पर पीएम आवास को लेकर सवाल

शिकायत में पनखतिया तालाब, दर्री तालाब, बंधवा तालाब, ठाकुरदिया डभरी, हमालपारा बंधवा तालाब, खंती तालाब और चंदन तालाब पार सहित विभिन्न स्थानों का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में प्रधानमंत्री आवासों के लिए भवन अनुज्ञा अथवा निर्माण संबंधी अनुमति दी गई है।

यदि संबंधित भूमि वास्तव में तालाब, खंती, शासकीय अथवा अन्य प्रतिबंधित श्रेणी की भूमि है, तो वहां निर्माण की अनुमति और सरकारी आवास योजना का लाभ किस आधार पर दिया गया—यह जांच का महत्वपूर्ण विषय हो सकता है।

पात्र हितग्राही अब भी आवास से वंचित?

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि एक ओर कथित रूप से अपात्र लोगों को योजना का लाभ मिलने के आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर वास्तविक पात्र परिवार आज भी झोपड़ी, टेंट अथवा अस्थायी आवास में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृतियों और भुगतान की वार्डवार, हितग्राहीवार तथा भूमि अभिलेखों के आधार पर जांच की मांग उठ रही है।

पूर्व नगरपालिका कार्यकाल को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं कि अवैध प्लाटिंग की शिकायतों के बावजूद कुछ लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया। इन आरोपों में तत्कालीन पार्षदों और कथित बिचौलियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

कोटवारी भूमि की बिक्री का भी आरोप

शिकायत में ठाकुरदिया क्षेत्र के कोटवार श्रुति दास महंत हालु पर कोटवारी भूमि को एफसीआई रोड क्षेत्र में कथित तौर पर बेचने का गंभीर आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उक्त भूमि पर करोड़ों रुपये की कथित अवैध प्लाटिंग की गई और वहां निर्माण भी हो चुके हैं।

यह मामला राजस्व अभिलेखों, भूमि की प्रकृति, स्वामित्व/अधिकार तथा कथित बिक्री दस्तावेजों की जांच से ही स्पष्ट हो सकता है। इसलिए पूरे मामले में राजस्व विभाग द्वारा स्थल निरीक्षण एवं रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।

कलेक्टर से पुनः शिकायत

पूरे मामले को लेकर रायगढ़ कलेक्टर से पुनः शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार प्रशासन की ओर से उचित कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।

वहीं RTI कार्यकर्ता एवं पूर्व पार्षद शशि साहू ने भी राज्य सरकार को खरसिया में कथित अवैध प्लाटिंग और उससे जुड़े मामलों की जानकारी कई बार दिए जाने का दावा किया है।

अब सवाल यह है कि—

क्या खरसिया शहर में चल रही कथित अवैध प्लाटिंग की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या तालाब, खंती, कोटवारी अथवा अन्य प्रतिबंधित भूमि पर हुए निर्माणों की जांच होगी?
क्या प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों का भूमि रिकॉर्ड और पात्रता का सत्यापन कराया जाएगा?
और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या अवैध वसूली प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?

मामले में संबंधित नगर पालिका, राजस्व विभाग और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

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