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18 साल बाद बहुचर्चित पोरा बाई नकल प्रकरण मामले में आया नया मोड़ : द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने निचली अदालत के फैसले को पलटा, 4 आरोपियों को 5-5 साल की सजा, 20-20 हजार का लगाया जुर्माना …

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जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़  बहुचर्चित पोरा बाई नकल प्रकरण में 18 साल बाद नया मोड़ आ गया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश जी.आर. पटेल की अदालत ने अपील की सुनवाई के बाद छात्रा पोरा बाई, केंद्रा अध्यक्ष फूलसाय नृसिंह, प्राचार्य एस.एल. जाटव और दीपक जाटव को दोषी करार देते हुए 5-5 वर्ष के कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं मामले के अन्य पांच आरोपियों को दोष मुक्त किया गया है।

क्या है मामला

यह मामला वर्ष 2008 का है, जब शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिर्रा की छात्रा पोरा बाई ने कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में प्रदेश की प्रावीण्य सूची में पहला स्थान प्राप्त किया था। जांच के दौरान यह सामने आया था कि पोरा बाई की उत्तरपुस्तिका में लिखावट उसकी नहीं थी। इसी आधार पर नकल और दस्तावेजों में हेराफेरी का आरोप लगाया गया। परिणाम घोषित होने के बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल को दस्तावेजों और उत्तरपुस्तिका को लेकर संदेह हुआ।

जिसके बाद माशिम के सचिव के निर्देश पर उपसचिव पी.के. पांडेय से जांच कराई गई, जिसमें पोरा बाई का प्रवेश और परीक्षा से जुड़े दस्तावेज गलत तरीके से तैयार पाए गए। जांच प्रतिवेदन के आधार पर पोरा बाई सहित प्राचार्य एस.एल. जाटव, केंद्राध्यक्ष फूलसाय, सहायक केंद्राध्यक्ष बालचंद भारती समेत कुल नौ लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी एवं परीक्षा अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया गया।

मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी चांपा की अदालत में हुई, जहां लगभग 12 साल बाद आए फैसले में न्यायिक मजिस्ट्रेट सुबोध मिश्रा ने अभियोजन के आरोप सिद्ध न होने पर सभी नौ आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया था। न्यायाधीश ने कहा था कि जिन आशंकाओं को लेकर मामले की शुरुआत हुई उन आशंकाओं को अभियोजन सही साबित करने में असफल रहा इसलिए सभी नौ आरोपितों को दोषमुक्त किया जाता है। इस तरह 13 साल पुराने बहुचर्चित पोराबाई कांड का पटाक्षेप हो गया था।

इसके बाद मामले को लेकर द्वितीय अपर सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई। अपील की सुनवाई के बाद अदालत ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए चार आरोपियों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई, जबकि शेष 5 आरोपियों को राहत मिली है। कोर्ट ने अंत में टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपियों ने केवल माध्यमिक शिक्षा मंडल के विरुद्ध ही नहीं, बल्कि उन छात्रों के विरुद्ध भी अपराध किया है, जो अपने भविष्य के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।

 

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