छत्तीसगढ़ी बर ‘हाँका’*…नंदकिशोर शुक्ला..
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*छत्तीसगढ़ी बर ‘हाँका’*

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*’छत्तीसगढ़-महतारी’ के कोरा मँ कतको अकन भासामन अवतरिन, फूलीन-फरीन अउ बगरत गइन. हल्बी-गोंडी, सरगुजिही, कुड़ुख, भतरी, सादरी जइसे कई ठिन भासा. फेर इन भासामन के बीच ‘छत्तीसगढ़ी’ पूरा राज के भासा कहाइस. बस्तर ले सरगुजा तक छत्तीसगढ़ी बोले अउ समझे जाथे. हमर ‘चिन्हारी-छत्तीसगढ़ी’ के संग 2000 मँ ‘मध्यप्रदेश’ ले अलग होके छत्तीसगढ़ नवा राज बनिस. नक्सा मँ त छत्तीसगढ़ अलग दिखे लग गे. फेर हमर भासा छत्तीसगढ़ी सँग छल होगे. सन् 2000 ले जेन छल होयहे तेन ह आजो 2022 तक होवत हे. छत्तीसगढ़ लs केंदरी-सरकार के भासाई-बरगीकरन सूची मँ ‘छत्तीसगढ़ी-भासी- इलाका’ के रूप मँ ‘अलगा-चिन्हारी’ वाले बरग या खंड मँ सामिल नइ करे गे हे. ओला ‘हिन्दी-भासी-राज्य’ के सँग जोर देहे गे हे. ए पाय के अभियो हमलs अपन चिन्हारी के सनमान खातिर लड़े बर परत हे*.
*ये लड़ई जारी रहिस त 2007 मँ छत्तीसगढ़ी लs हिंदी के सँग राजभासा के रूप मँ छत्तीसगढ़ मँ दरजा दे देहे गइस. छत्तीसगढ़ी परचार-परसार बर, ‘सरकारी- कामकाज’ अउ ‘पढ़ई-लिखई’ के भासा बनाए बर ‘छत्तीसगढ़ी राजभासा आयोग’ के गठन घलोक करे गइस. फेर राजभासा बने के 14 अउ राज बने के 21 बछर बाद भी छत्तीसगढ़ी न तो ‘सरकारी-कामकाज’ के भासा बन पाइस अउ न ‘पढ़ई-लिखई’ के. उलटा आयोग के नाँव बदल के ‘छत्तीसगढ़ी’ ले ‘छत्तीसगढ़’ राजभासा आयोग होगे*.
*हमर पुरखा मन हमर ‘चिन्हारी-छत्तीसगढ़ी’ अउ राज के महतारी भासा हल्बी-गोंड़ी, भतरी, सरगुजिही संग जेन सपना देखे रहिन वो आजो सपना ही अब तक रहे हे. काबर के हमर पुरखामन के पहिचान उँखर महतारी- भासा के काम-काज के सँग रहे हे. पुरखामन अपन महतारी-असमिता के मान खातिर खूब बुता करिन. इही पाय के तो हिन्दी-भासा के बियाकरन के 35 बछर पइहिली ले ही हीरालाल चँदरनाहु ‘काब्योपाध्याय’ जी 1885 मँ ही छत्तीसगढ़ी के बियाकरन बना दे रहिन. जेला उन 1880 मँ लिखना सुरू कर देहे रहिनहें. ऊँखर इही छत्तीसगढ़ी-बियाकरन के अँगरेजी अनुवाद करा के ‘जार्ज ग्रियर्सन’ जी 1890 मँ ही कलकत्ता मँ परकासित करा देहे रहिनहें ! जबकि ओखर 30बछर बाद हिन्दी-बियाकरन परकासित होइस*.
*जाने अउ माने के लइक जानकारी*…
*(१)’छत्तीसगढ़ी’ ह अढ़ाई करोड़ ले जादा ‘छत्तीसगढ़िया-मनखे’ मन के ‘महतारी-भासा’ हरय*.
*(२)छत्तीसगढ़ी के ‘बियाकरन’ के सिरजन सन् 1885 मँ ही धमतरी जिला के बरनाकुलर इस्कूल मँ सिक्छक रहे हीरालाल चँदरनाहु ‘काब्योपाध्याय’ जी कर डारे रहिनहें*.
*(३)छत्तीसगढ़ी के लिपी संसकिरीत, हिन्दी, बोड़ो, मइथिली, अवधी, बिरज जइसे कई ठिन भासा असन ‘देवनागरी’ हे*.
*(४) छत्तीसगढ़ी ह पच्छिम ‘अर्ध-मागधी’ ले निकले हे. फेर पूरा परभाव पूरब ‘अर्ध-मागधी’ अउ ‘महाराष्ट्र’ के पराकिरित (बिदर्भ) के परभाव जादा हे*.
*(५) इतिहास… छत्तीसगढ़ी के उमर हजार साल माने जाथे. ए ह बखत-बखत मँ अपन रूप बदलत गे हे.
छत्तीसगढ़ी मँ मराठी, अवधी, बुन्देली, बघेली, भोजपुरी, मालवी, राजस्थानी, मइथिली के परभाव पड़त गे अउ सबद मिलत गे.
छत्तीसगढ़ी भासा के बिकास मँ समय के सँग अँगरेजी के सबद घलोक मिलत गे हे.
(६) *छत्तीसगढ़ मँ परमुख रूप ले छत्तीसगढ़ी भासा ही बोले जथे. रइपुर, बिलासपुर, दुरूग सम्भाग के पूरा इलाका छत्तीसगढ़ी-भासी हे.
सरगुजा मँ सरगुजिही, कुड़ुख, कोरवी, सादरी सँग छत्तीसगढ़ी बोले जथे. बस्तर इलाका मँ हल्बी अउ गोंडी, भतरी सँग छत्तीसगढ़ी बोले जथे*.)
(७) छत्तीसगढ़ी ह अधिकारिक रूप मँ छत्तीसगढ़-राज के 28नवंबर 2007 ले ‘राज-भासा’ हे.
छत्तीसगढ़ के राज-गीत छत्तीसगढ़ी मँ रचित महतारी-बन्दना ‘अरपा पइरी के धार …’ हे.
*(८) छत्तीसगढ़ी-भासा कन अपन सबद-संसार के भंडार हे. छत्तीसगढ़ी साहित घलोक के भंडार हे. हमर जादातर लोक-साहित ह मउखिक ही रहे हे*.
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*सोचे के बात हे के*…
*अतका सब होय के बाद घलोक छत्तीसगढ़ी ह अभियो भी छत्तीसगढ़- राज के ‘सरकारी- कामकाज’ अउ ‘पढ़ई-लिखई’ के भासा नइ बन पाए हे. दुनिया भर के महान मनखेमन, बिदवानमन, भासा के जानकारमन कहि चुके हें, के ‘महतारी-भासा’ मँ सिक्छा देना लइकामन के बिकास मँ जरूरी हे. एखरेसेती महारास्ट मँ मराठी, बंगाल मँ बंगाली, गुजरात मँ गुजराती, तमिलनाडु मँ तमिल, आंध्र-तेलंगाना मँ तेलगु, केरल मँ मलायली मँ इस्कूली- सिक्छा दे जाथे. फेर छत्तीसगढ़ मँ* *छत्तीसगढ़ियामन अपन महतारी-भासा के सिक्छा ले वंचित हे. जबकि सबो कानून ह कहत हे के दे जाय*.
*संविधान के
धारा-29 के तहत देहे गे ‘संस्कृति और शिक्षा संबंधी मूल अधिकार’ अउ
धारा-350(क) के तहत महतारी-भासा मँ सिक्छा के अधिकार दे गे हे.
*यूपीए सरकार के बनाय कानून ‘शिक्षा का अधिकार(RTE)-2009’ मँ अधिकार दे गे हे.
राज के राजभासा के तहत महतारी भासा मँ सिक्छा के अधिकार हे.
‘नवा रास्टीय सिक्छा नीति(NEP)-2020’ मँ पाँचमी-कक्छा तक ‘अनिवार्य’ रूप ले ‘महतारी-भासा’ मँ ही सिक्छा के अधिकार हे.
*सबो अधिकार होय के बाद घलोक छत्तीसगढ़ियामन अपन महतारी-भासा मँ सिक्छा ले वंचित हे. सरकारी-कामकाज ले वंचित हे. कोनो भी सरकार मँ अभी तक ‘छत्तीसगढ़ी-भासा’ लs पूरा सनमान नइ मिल पाय हे*.
*छत्तीसगढ़ी अगर सबो जगह लागू हो जाही त का होही ? ये सवाल ह छत्तीसगढ़ियामन के मन लs मथत रहिथे. छत्तीसगढ़ी अगर सबो जगह लागू हो जाही त छत्तीसगढ़ियामन बर रोजगार बाढ़ही. सरकारी नउकरी मँ छत्तीसगढ़ियामन के दबदबा होही. निजी होवय के सरकारी, बजार होवय के बइपार; सबो जगह छत्तीसगढ़ियामन अपन हक-अधिकार ल पाहीं*.
*इही सब खातिर छत्तीसगढ़ी, हल्बी-गोंड़ी, सरगुजिही, कुड़ुख मँ ‘अनिवार्य’ रूप ले, माधियम रूप ले हम सिक्छा के माँग करत हन. सरकार ल एला तत्काल लागू करना चाही. भूपेस- सरकार मँ छत्तीसगढ़िया महोल बने हे. फेर छत्तीसगढ़ी के जगह अँगरेजी लs आगू बढ़ाय के उदिम करे जात हे*. *’छत्तीसगढ़िया-मुखिया’ होय के बाद भी अगर इहू बेरा छत्तीसगढ़ी ह ‘सरकारी-कामकाज’ अउ इँहाँ के महतारी-भासामन मँ ‘अनिवार्य’ रूप से सिक्छा नइ मिल पाही त ए ह ‘बहुते-बड़का’ चूक होही*
@ *एखरेसेती जबर गोहार हे*…..
*नगर-नगर, गाँव-गाँव आप सब छत्तीसगढ़ी बर, हल्बी-गोंडी बर, सरगुजिही, कुड़ुख बर, ‘महतारी-भासा’ बर हाँका पार दव*.
🙏जय-जोहार🙏जय-छत्तीसगढ़🙏जय-छत्तीसगढ़ी🙏
@ *’मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी*’ @
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