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पर्दाफाश

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जिंदा ग्रामीण को मृत बता किया प्रधानमंत्री आवास से वंचित…दर-दर की ठोकर खा रहा ग्रामीण…सरपंच सचिव का फर्जीवाड़ा हुआ उजागर..

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जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया सरपंच और सचिव ने,गरीब व्यक्ति को कर दिया पीएम आवास से वंचित

सरपंच,सचिव के इस कृत्य पर प्रशासन का क्या होगा एक्सन बड़ा सवाल ?

असलम आलम खान रिज़वी धरमजयगढ़ ब्यूरो रिपोर्ट

 

धरमजयगढ़/रायगढ़ — जहाँ एक तरफ सरकार पूरे देश में 2024 तक हरेक गरीब पात्र परिवार को पी एम आवास योजना का लाभ दिलाने का भरसक प्रयास कर रहा है. वहीँ धरमजयगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बासाझार हीरे का अपवाद ग्रेफाइट साबित हो रहा है. यहाँ पीएम आवास योजना से गरीब हितग्राहियों को वंचित किया जा रहा है. किसी को अपात्र तो किसी जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर उनका पीएम आवास पात्रता सूचि से नाम कटवा दिया जा रहा।

मिली जानकारी मुताबिक ऐसा एक मामला प्रकाश में आया है जिसमे प्रधानमंत्री आवास योजना के 2011की सर्वे सूची में जिनका नाम जारी किया गया है.उसमे से कुछ पात्र हितग्राहियों को 2016 के पंचायत प्रस्ताव में अपात्र घोषित कर उनके साथ अन्याय किया गया है।
पूरा मामला इस तरहा है की हितग्राही दयाराम धनवार पिता जगबंधु साकिन ग्राम बांसाझार को 2011 की सर्वे सूची में प्रधानमंत्री आवास के लिए पात्रता जारी किया गया लेकिन पूर्व सरपंच भुनेश्वर राठिया द्वारा पंचायत प्रस्ताव में अपात्र घोषित कर दिया गया.

जबकि वास्तविकता के धरातल पर देखा जाये तो दयाराम की आर्थिक हालत बहुत ख़राब है एवं इस उम्र दराज परिवार में पति पत्नी दो ही सदस्य हैं , जिनके मिट्टी का मकान देखने से लगता है कि बारिश में कभी भी ढह सकता है। बड़ी विडंबन की बात है, एक तरफ शासन द्वारा गरीबों को आवास दिलाने के लिए योजना बनाया गया परन्तु ऐसे बद नियत जनप्रतिनिधि के कारण गरीब तबके के लोगो को सरकार की महत्वकांक्षी योजना का लाभ नहीं मिल पाता.

हद तो तब हो गई ज़ब यहाँ खुला राम कँवर पिता नान्हि राम को जीवित होते हुए मृत लिख कर उनका प्रधानमंत्री आवास पात्रता लिस्ट से नाम काट दिया गया. जबकि सचिव द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र या रजिस्टर भी एक बार देखा नही गया।ग्रामीणों की माने तो पीड़ित हितग्राही खुला राम एवं उनके पुत्र दोनों आज भी मिट्टी के मकान में रहते है जिनके घर की जर्जर हालत को देखने से लग रहा है की घर कभी भी गिर सकता है।

इस सम्बन्ध में खुला राम का कहना है की मैंने शासन के प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया था.लेकिन आज तक नहीं मिल पाया.अभी हाल ही में नया वर्तमान सरपंच से पता चला की सूची में मैं मृत घोषित किया गया हूँ।मैं ये सोंच कर हैरान परेशान हूँ की आखिर सचिव और सरपंच इतनी घोर लापरवाही कैसे कर दिए?पीड़ित ने बताया मेरे द्वारा अब फिर से गुहार लगाया हूँ की मेरा नाम इस बार फिर आवास सूचि में जोड़कर मुझे आवास दिलाने की कृपा करें ।

*क्या कहते हैं वर्तमान सरपंच बाँसाझार इमला बाई राठिया*– मैंने कार्यभार लेने के बाद पता किया तो सूची में हितग्राही खुलाराम मृत घोषित है, लेकिन सत्यता जानने के लिए सूचना के अधिकार ( रति ) से जानकारी निकलवायी जिसमे प्रमाणित हो गया की सूचि में उसे मृत बताया गया है ,जबकि खुला राम आज भी जीवित है जिसको जनपद जाकर जोड़ने की कोशिस करूंगी और उसे उसका हक़ दिलाने पूरा प्रयास करुँगी. बता दें इस बात को लेकर ग्रामीणों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

*क्या कहते हैं सचिव नरेंद्र यादव* — पूर्व सचिव ने ये कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया की ,उस समय गांव वालो द्वारा पंचायत में जो बताया गया वही लिखा हूँ,अभी मीडिया के माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई है. तो मैं जनपद में पता करवाता हूँ, हालांकि अभी बासाझार पंचायत में मैं पदस्थ नहीं हूं।बहरहाल आखिर किसकी गलती का खामियाज़ा गरीब परिवार भुगत रहा है यह जनपद पंचायत के आला अधिकारी ही बेहतर समझेंगे ?

*क्या कहते हैं जनपद सीईओ आज्ञामणि पटेल*
मुख्य कार्यपालन अधिकारी पटेल ने इस मामले में *कब बबा मरही ता कब बरा खाबो* की तर्ज पर बड़े ही रूखे अंदाज़ में कहा की अभी अभी तो मामला उजागर हुआ है ,देखते हैं जांच करवाएंगे.

*पूरे मामले को लेकर जनपद अध्यक्ष पुनीत राठिया को फोन लगाया तो घंटी घनघनाती रही लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.वहीँ जनपद उपाध्यक्ष ने फोन बाकायदा उठाया और दूरभाष पर कहा की इसके लिए जनपद सीईओ और सम्बंधित सचिव दोनों जिम्मेदार हैं सीईओ को उचित जांचकर दोषियों पर क़ानूनी कार्यवाही करनी चाहिए*.

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