आज भी बेटी के पिता को बिना कसूर किया जाता है दंडित!,पिता की व्यथा क्या बेटी का पिता होना आज भी अपराध है?

*🔴पर्दाफाश न्यूज*

*🔴रायगढ़ / शक्ति*

*🔴फर्जी मार्कसीट के आधार पर कम उम्र का बताकर कर रहे थे शादी पिता ने पकड़ ली चोरी,भूपदेवपुर थाने में हुई शिकायत,शिकायत वापस लेने बना रहे समाजिक दबाव…!*

 

रायगढ़ – फर्जी मार्कसीट के सहारे शादी करने जा रहे,युवक व उसके परिवार की सच्चाई आई सामने।फर्जी अंकसूची व आधार कार्ड दिखाकर कम उम्र का बताते हुए लड़की पक्ष से किया गया है छलावा।लड़की का पिता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।वही समाजिक दबाव बनाकर,लड़की के पिता को,दबाया जा रहा है,कही भी शिकायत करने से सामाजिक रूप से दण्डित करने की बात पिता से कही जा रही है।धूमधाम से सगाई करने वाले पिता को अर्थदण्ड देने बनाया गया दबाव।क्या लड़की का पिता होना भी अब अपराध हो गया है।छलावा करने वाले परिवार को प्रश्रय देता यह समाज आखिर किस दिशा में जा रहा है।पिता को मजबूर कर शिकायत वापस लेने बनाया है दबाव।इस पूरे मामले में लड़के और उसके परिजनों पर तत्काल fir दर्ज होना चाहिए।

जाली सर्टिफिकेट से आधार कार्ड बना कर सगाई करने का बड़ा मामला प्रकाश में आया है।दरअसल खरसिया विकासखंड के कोंड़तराई ग्राम के गणपत डनसेना शिक्षक का पुत्र चेतनानंद डनसेना की सगाई पुटेकेला निवासी जयलाल जायसवाल की पुत्री के साथ 9/5/2019 को विधी विधान और धूमधाम के साथ सम्पन हुआ था ग्राम पुटेकेला निवासी जयलाल जायसवाल ने बताया कि मेरे साथ बहुत बड़ा छल किया गया है। उसने कहा कि गनपत डनसेना द्वारा अपने बेटे का उम्र छिपा कर जाली सर्टिफिकेट एवं जाली आधारकार्ड बना कर पुत्र के उम्र को कम बताया गया है।

सगाई के तीन दिन बाद तक विवाह लग्न की तारीख गनपत डनसेना शिक्षक एवं उसके भाई महीपत डनसेना शिक्षक द्वारा आज कल कहकर शादी की तारीख ही फ़ाइनल तय नहीं कर रहे थे।लड़की के पिता द्वारा कई बार फोन करने पर कह दिया जाता था की हम लोग जल्द ही विवाह का मुहूर्त हमारे गांव के पंडित से निकलवाने को कहा है तुम इंतजार करो।

सगाई के सात दिनों तक लड़की के पिता को विवाह के तारिख नहीं दिया गया तब जयलाल जायसवाल पुटेकेला निवासी ने अपनी सुझ बुझ लगाते हुए चेतनानंद डनसेना पिता गनपत डनसेना शिक्षक कोंड़तराई निवासी जो अतिथि शिक्षक के रूप में ग्राम दर्रामुड़ा में स्थित एस के एस कंपनी के स्कूल मे अध्यापन का कार्य कर रहा था उसकी जानकारी निकाली गई तो उसके पैरों तले जमीन खसक गई चेतनानंद डनसेना के सर्टिफिकेट से पता चला कि चेतनानंद डनसेना का उम्र में और दिये हुए फर्जी आधार कार्ड सर्टिफिकेट में लगभग चार साल का फर्क था । पिता ने फर्जी आधार कार्ड सर्टिफिकेट देखा तो उसे यह समझते देर नहीं लगी की मेरे और मेरी पुत्री के साथ धोखा हुआ है और जयलाल जायसवाल ने ठान ली कि अब कोंड़तराई निवासी चेतनानंद डनसेना पिता गनपत डनसेना शिक्षक चाचा महीपत डनसेना शिक्षक के यहां अपनी पुत्री को नही दूंगा और जयलाल जायसवाल ने मन बनाया है की जाली सर्टिफिकेट अधार कार्ड बनाने वालोंं के खिलाफ धोखा देकर किसी की बेटी की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों के उपर थाने में धोखाधड़ी का शिकायत दर्ज करवा कर कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने की ठानी।

किन्तु जयलाल को क्या पता था कि समाज मे आज भी बेटी के पिता को ही कसूरवार माना जायेगा जबकि धोखा लड़के पक्ष के लोगों ने किया,अब जब जयलाल थाने में शिकायत दर्ज करवाने गया तो,गनपत और महिपत दोनों भाइयों ने मिलकर जयलाल के ऊपर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि तू शिकायत करेगा तो कोई तेरी बेटी से शादी नही करेंगे,और एक सामाजिक बैठक भी पिता गनपत और चाचा महिपत के द्वारा बुला लिया गया,जहां सामाजिक व्यक्तियों द्वारा गनपत पिता व चाचा महिपत से बैठक बैठने और उसके पक्ष में निर्णय करने के एवज में 51,000 रु और वही पीड़ित जयलाल जयसवाल जिसके साथ धोखा हुआ है उससे धोखे के खिलाफ शिकायत करने की सजा के तौर पर 11,000 रु सजा के तौर पर डाड़ लिया गया।

जयलाल जायसवाल (पिता)के कहे अनुसार उसने सगाई में जितने भी रु खर्च किये थे,वो सब पानी मे गए,वही लड़के पक्ष द्वारा सगाई में दिए गए गहने जेवर सब वापस करवा दिए गए।उ लड़की के पिता के ऊपर हाई वोल्टेज में सामाजिक दबाव बना दिया गया।लड़की के पिता हो तुम्हे कुछ बोलने का अधिकार ही नही है।और बेबस पिता धोखे का शिकार होने के बाद,समाज के उन ठेकेदारों के कोप का भाजन बना जो लड़के के पिता को तो न समझा सके उल्टे लड़की के पिता को उसके द्वारा की गई शिकायत को वापस लेने और सामाजिक व्यक्ति के धोखे के खिलाफ थाने जाने को उसका जुर्म मानकर उससे 11,000 रु अर्थदण्ड लिया गया जिससे पिता बेहद परेशान हुआ और उसने आत्महत्या की बाते भी अन्य परिजनों से कह डाली,लेकिन परिवारिक लोगों की समझाईस, शुभचिंतकों की समझाईस के बाद पिता अब गुमसुम है,वह बार बार यही कह रहा है कि आखिर मेरी गलती क्या थी?क्या बेटी का पिता होना आज भी अपराध है।।

क्या ऐसा समाजिक न्याय उचित है? जिसमे एक पक्ष के हित में फैसले सुनाए जाते है,और जिसके साथ गलत हुआ है उससे अर्थदंड लेकर शिकायत वापस करने का दबाव बनाया गया। भूपदेवपुर थाना में पिता के द्वारा लिखित शिकायत की गई है लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नही हुई है क्योंकि इस मामले में भी कुछ छुटभैये नेताओ द्वारा दलाली की जा रही है लड़के पक्ष, आरोपी से मिलकर मोटी रकम लेके मामले को ठंडे बस्ते में डालने सबंधित थाने में कह दिया गया है,ये छुटभैये एक मंत्री के करीबी बताये जा रहें है।

बेटियों का सम्मान इतना हल्का तो किसी समाज मे नही होना चाहिए।समाज की इन खोखली धारणाओं को आज बदलने की जरूरत है क्योंकि हर घर मे बेटियां है,आज इस बेटी के साथ गलत हुआ है,कल किसी और घर की बेटी के साथ यही घटना दोहराया जायेगा, क्योकि हम जो देते है समाज को वही हमको प्रतिफल रूप में मिलता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *