⭕ रहने को घर नहीं – सोने को बिस्तर नहीं ….…अपना तो है ऊपर वाला…….अब तक उसी ने संभाला…फूलबाई*

*⭕रहने को घर नहीं – सोने को बिस्तर नहीं – अब तक तुम्हीं ने संभाला फूलबाई*

*खरसिया/रायगढ़ यूं तो राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार के द्वारा बड़े बुजुर्गों एवं जरूरतमंदों के लिए कागजों एवं फाइलों में सैकड़ों योजनाएं संचालित की जा रही हैं ।

 

जिम्मेदार अधिकारियों की मानें तो इन योजनाओं का लाभ भी जरूरतमंद लोगों को बखूबी मिल रहा है । लेकिन सच्चाई इसके उलट है । जब आप जमीन पर उतर कर इन योजनाओं की पड़ताल करते हैं। तो आपको फूलबाई जैसे हजारों लाखों महिलाएं मिल जाएंगी जिनके रहने के लिए घर नहीं, सोने को बिस्तर नहीं, दो वक्त के भोजन का भी जिनके पास व्यवस्था नहीं है। जिस पेंशन के सहारे अपना जीवन यापन करते हैं ऐसे जरूरतमंदों को कई महीनों से पेंशन भी नही मिला है। जी हां ऐसी ही एक बुजुर्ग महिला लगभग 75 वर्ष फूलबाई जोकि खरसिया एसडीएम गिरीश रामटेके के बंगले के बगल में एक पुराने गोदाम के बरामदे पर पिछले 10 वर्षों से रहती है चाहे 45 डिग्री सेल्सियस गर्मी का तापमान हो या फिर भरी बरसात हो या कड़कड़ाती ठंड हो हर मौसम में रहने को मजबूर है।
फूलबाई बेवा बखन से जब हमने बात की तो उसने बताया कि वार्ड क्रमांक 4 कि वह मूलतः रहने वाली है। चांपा सिवनी से शादी हो कर के खरसिया आई थी उसके पति का खुद का घर एवं जमीन वार्ड क्रमांक 4 में था जिसे उसके भांजे टेकलाल के द्वारा वार्ड क्रमांक 4 के वर्तमान पार्षद पति को बेच दिया गया है।
उक्त बुजुर्ग महिला को उसके भांजे एवं पार्षद पति के द्वारा अच्छा घर एवं रहने की सुविधा देने का आश्वासन भी दिया गया था किंतु पिछले 10 – 12वर्षों से उक्त बुजुर्ग महिला एसडीएम बंगले के बगल में सरकारी गोदाम के बरामदे पर भरी बरसात ,भरी गर्मी एवं कड़कड़ाती ठंड के बीच पिछले 10-12 वर्षों से अपना जीवन यापन करने को मजबूर है । ना ही उसकी सुध लेने के लिए कभी वार्ड का कोई पार्षद पहुंचा ना ही नगर पालिका के अध्यक्ष पहुंचे ना ही सरकार के नुमाइंदे चाहे नगरपालिका कि सीएमओ का है। राजस्व विभाग के कोई अधिकारी कभी भी उनकी सुध लेने कोई नहीं पहुंचा।
पहले भी जब उक्त बुजुर्ग महिला की समस्या को मीडिया ने उठाया था तो उसे अटल आवास में आशियाना देने के लिए बात कह कर भेजा तो गया लेकिन 5-7 परिवारों को दो कमरे में रहने के लिए कहा गया वहां भी उक्त 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला को अपने सर छुपाने को जगह नहीं मिली अंततः फिर एसडीएम बंगले के बगल में गोदाम के नीचे बरामदे में ही अपना जीवन बसर करने महिला फूलबाई वापस आ गई जहां पर वह रहती है बढ़ती उम्र एवं चल फिर पाने में अक्षम अशक्त हो चुकी उक्त महिला फूल बाई को आते जाते राहगीरों के द्वारा कभी कुछ खाने को दे दिया जाता है। जिससे वह अपना पेट भर्ती है तो कोई उसे कबाड़ दे देता है। जिसे बेचकर के वह अपने दो वक्त की रोटी की व्यवस्था करती है। तो हम देख सकते हैं कि कागजों में प्रधानमंत्री आवास योजना सुखद सहारा योजना एवं ऐसे जरूरतमंद लोगों के लिए रैन बसेरा का निर्माण किया गया है । लेकिन वास्तव में जरूरतमंद लोगों को आज भी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। खरसिया नगरपालिका के अंतर्गत पंडित दीनदयाल बस स्टैंड में रैन बसेरा का निर्माण भी किया गया है। जिसे खरसिया नगरपालिका में काम करने वाले सफाई कर्मियों को नगर पालिका एवं ठेकेदारों के द्वारा अवैधानिक रूप से दिया गया है । जबकि वह रैन बसेरा फूलबाई जैसे जरूरतमंद लोगों के लिए ही बनाया गया है । जब हमने फूलबाई से पूछा कि उसने क्या चुनाव में मतदान किया है तो उसने बड़े ही खुशी के साथ बताया कि हां बेटा मैं हर चुनाव में वोट डालती हूं पंजा छाप को मैं वोट देती हूं । जब हमने उनसे पूछा कि कोई भी निर्वाचित पार्षद अध्यक्ष विधायक या सांसद कभी आपसे मिलने आया है । आपके सुख दुख की पूछताछ किया है तो बड़े ही सीधे साधे आवाज में फुल बाइक आती है । कि बेटा कभु कभु तोर कश मन आ जाते हैं। अउ कछु खाए बर दे देते हैं कोई में मोर जिंदगी चलत है। जब हमने पूछा कि आप सरकार से क्या कहना चाहती हैं तब बड़े ही मार्मिक स्वर में फूलबाई कहती हैं कि बेटा अब तो मोर जाए कि दिन आ गिस यहीं मोर जिंदगी ल त्याग दुहूँ।। क्या वास्तव में फूलबाई जैसे जरूरतमंद को रहने को घर एवं दो वक्त की रोटी मिल पाएगी।
*⭕भूपेंद्र वैष्णव की रिपोर्ट⭕9754160816*

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