⭕खरसिया एवं शक्ति बना सट्टेबाजों के लिए स्वर्ग…….

*⭕खरसिया एवं शक्ति बना सट्टेबाजों के लिए स्वर्ग*

*⭕वर्ल्ड कप क्रिकेट में प्रतिदिन करोड़ों का सट्टा*

*⭕सट्टे के कर्ज तले लोग आत्महत्या करने हो रहे मजबूर*

*रायगढ़* खरसिया एवं शक्ति सट्टेबाजों के लिए इन दिनों स्वर्ग साबित हो रहा है। भूतनाथ एवं बांबे सट्टा के माध्यम से प्रतिदिन हजारों गरीबों की गाढ़ी कमाई को लूटने का खेल लंबे समय से बदस्तूर जारी है । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा सभी पुलिस कप्तानों को सट्टे पर तत्काल कार्यवाही करने सख्त निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद खरसिया एवं शक्ति में प्रतिदिन खुलेआम सट्टेबाजों(खाईवालों) की गद्दी पर कभी कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। इक्का-दुक्का सट्टा पट्टी लिखने वालों पर कार्यवाही करके वाहवाही लूटने का प्रयास जरूर किया गया है। लेकिन खरसिया एवं शक्ति के माध्यम से पूरे छत्तीसगढ़ में क्रिकेट सट्टा का कारोबार चलाने वाले सीधे नागपुर एवं मुख्यालय से संपर्क में रहकर प्रतिदिन करोड़ों रुपए का सट्टा खिलाने वाले इन खाईवालों तक कानून के रखवाले नहीं पहुंच सकें है। जिस कारण सट्टा के माध्यम से रातों-रात धनवान बनने के चक्कर में आज का युवा वर्ग बर्बाद होता चला जा रहा है। पिछले 1 वर्षों में सट्टा के कर्ज के चलते ही रायगढ़ जिले के पांच से छह लोगों ने मौत को गले लगा लिया था । खरसिया में भी सैकड़ों परिवार सट्टेबाजों के गिरफ्त में बर्बादी के कगार पर हैं ।

दुखद बात तो यह है कि जोरों से चलने वाले मटका बाजार में अब महिलाएं भी बुरी तरीके से फंस चुकी है। खुद महिलाएं भी सट्टा खेलने एवं लिखने का काम कर रही है। दिखाने को अन्य धंधों के माध्यम से एवं विभिन्न सामाजिक संस्थानों धार्मिक संस्थानों को दान धर्म एवं डोनेशन देकर अपनी अलग छवि दिखाने का प्रयास करने वाले यह सट्टा खाईवाल बकायदा एसी कमरों में बैठकर दर्जनों लैपटॉप एवं मोबाइल के माध्यम से अपने सैकड़ों हजारों लोगों की फौज के साथ प्रतिदिन करोड़ो रुपए के सट्टा के इस खेल को अंजाम देते हैं । इनके घरों में सुरक्षा के तौर पर बकायदा 20 -20 सीसी कैमरे लगे होते हैं । ताकि यदि गलती से भी पुलिस अथवा कोई प्रशासनिक टीम कार्रवाई के लिए पहुंचे तो इन खाईवालों को उसकी सूचना हो जाए। ताकि वो अपना सामान समेट कर रफूचक्कर हो जाए कहते हैं पुलिस अगर चाहे तो पाताल से भी मुजरिम को खोज निकलती है । लेकिन जब इन सट्टेबाजों के घर में छापा मारकर इन को गिरफ्तार करने की बात आती है । तो पुलिस के अधिकारियों के द्वारा सर्च वारंट एवं विभिन्न कानूनी अड़चनों का हवाला देते हुए कार्यवाही कर पाने में असमर्थता जताई जाती है। ना जाने ऐसी कौन सी मजबूरी है कि इन सवालों सट्टा खाई वालों के गिरेबान तक पुलिस के आला अधिकारियों के हाथ नहीं पहुंच पा रहे है। इसी का फायदा उठाते हुए यह सट्टा खाईवाल दिनदहाड़े अपनी गद्दी में बैठकर एसी कमरों में दर्जनों लैपटॉप के साथ दर्जनों मोबाइल के माध्यम से बेखौफ करोड़ो रुपए का अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। इन खाईवालों के द्वारा बड़े शान से कहा जाता है कि आगे पीछे हमारी सरकार यहां के हम हैं राजकुमार और निश्चित तौर पर या गाना इन खाई वालों के लिए फिट बैठता है। कभी उच्चाधिकारियों के द्वारा कार्रवाई के निर्देश होते हैं तो पट्टी लिखने वाले या खेलने वालों को कार्रवाई के नाम पर 107,16/ 151 आदि धाराओं के तहत कार्यवाही किया जाता है । किंतु बड़े पैमाने पर प्रतिदिन करोड़ों का काला कारोबार करने वाले इन सट्टेबाजों तक आला अधिकारी पहुंचना भी नहीं चाहते कुछ सट्टा खाई वालों ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया को यह भी बताया कि आरक्षक से लेकर के उच्चाधिकारियों तक जिसकी जितनी रसूख उसको उतना हफ्ता हमारे द्वारा दिया जाता है। यही कारण है कि जब कभी कोई बड़ी कार्रवाई की संभावना होती है हमें पहले से ही शहर छोड़ भाग जाने या अपना कारोबार एक-दो दिन बंद करने सूचना मिल जाती है । जिससे हम सतर्क हो जाते हैं सट्टा खाई वालों के इन बातों से तो स्पष्ट है की कार्यवाही करने वाले अधिकारियों के जो हाथ जिनके माध्यम से कार्यवाही की जानी है उनके इन सवालों से काफी मधुर संबंध रहते हैं । शायद यही कारण है छापा मारने के लिए टीम रवाना होने से पहले ही इन खाई वालों को कार्यवाही की सूचना दे दी जाती है। पिछले एक-दो सालों में सट्टेबाजों के गिरफ्त में कर्ज के तले 1 दर्जन से अधिक लोगों ने आत्महत्या कर मौत को गले लगा लिया है । दर्जनों परिवार इन सट्टेबाजों के चंगुल में फंसकर बर्बाद हो चुके हैं। इसके बावजूद उनके विरुद्ध किसी प्रकार की ठोस कार्यवाही नहीं होना इस काले कारोबार को बढ़ावा देने का काम कर रही है । क्रिकेट सट्टा खिलाने वालों ने मीडिया को नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आईपीएल में मैच भले ही कोई जीते या हारे हर रोज खाई वालों की चांदी रहती थी और आईपीएल क्रिकेट के दौरान करोड़ों रुपए का प्रॉफिट इन खाई वालों को हुआ है । किसी खाईवाल के द्वारा 15 से 20 लाख की नई गाड़ी ली गई है तो किसी के द्वारा करोड़ों की जमीन खरीदी गई है । कोई खाईवाल करोड़ों की आलीशान बिल्डिंग तैयार कर रहा है। इनको किसी भी प्रकार का कोई कानूनी कार्रवाई का भय नहीं है । यही कारण है कि आज हजारों परिवार बर्बाद होने के बाद भी इन खाईवालों तक कानून के हाथ नहीं पहुंच पा रहे हैं । क्या कभी इन ऊंची पहुंच का दावा करने वाले खाई वालों तक कानून के हाथ पहुंच पाएंगे या सिर्फ छोटे-मोटे सट्टा पट्टी लिखने वालों एवं खेलने वालों के खिलाफ ही कार्यवाही कर कानून के रखवाले अपनी पीठ थपथपा आएंगे यह एक बड़ा सवाल उठने लगा है। दबे स्वर में राजनीतिक लोगों से खुला संरक्षण की बात भी सुनने में आती है।

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