वट सावित्री व्रत आज 3 जून को है. सोमवार को सोमवती अमावस्या, ‘सर्वार्थसिद्धि’ योग और शनि जंयती भी है….

वट सावित्री व्रत आज 3 जून को है. सोमवार को सोमवती अमावस्या, ‘सर्वार्थसिद्धि’ योग और शनि जंयती भी है. जानिए इस वट सावित्री व्रत का महत्व और महिलाओं को कैसै मिलता है इस व्रत का लाभ.

नई दिल्ली: इस बार वट सावित्री का व्रत कल यानी कि 3 जून को है. वट सावित्री के मौके पर सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं. वट सावित्री व्रत में वट वृक्ष यानी कि बरगद के पेड़ का बहुत महत्व होता है. महिलाए इस व्रत में इसी वट वृक्ष की पूजा करती हैं. इस बार ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को वट सावित्री व्रत 3 जून को रखा जाएगा. अमावस्या की तारीख 2 जून शाम 4.39 बजे से शुरू होगा और 3 जून दोपहर 3.31 बजे तक रहेगी. इस साल वट सावित्री व्रत के दिन चार खास संयोग बने हैं, जिससे कि व्रत रखने वाली महिलाओं को विशेष लाभ और मन की इच्छा पूरी होगी. वट सावित्री का व्रत के दिन महिलाएं 16 श्रृंगार करती हैं और अपने पति की सलामति के लिए कामना करती हैं.

आपको बता दें कि 3 जून को दिन सोमवार है और इस दिन अमवस्या और शनि जयंती भी है. इस साल चार दुर्लभ संयोग इसमें बन रहे हैं, जिनमें सोमवती अमावस्या, अमृत सिद्धि योग, सवार्थ सिद्धि योग और त्रिग्रही संयोग शामिल है. हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार इस व्रत में वट और सावित्री दोनों की पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों भगवान का वास होता है. ब्रह्मा वृक्ष की जड़ में, विष्णु वृक्ष के तने में और शिव ऊपरी भाग में वास हो ता है. तो इसलिए इसकी पूजा करने से सारे दुख और दांपत्य जीवन में चल रहीं परेशानियां समाप्त हो जाती है. वट पूजा से अखंड सौभाग्य और उन्नति की प्राप्ति होती है. इस विशालकाय वट वृक्ष के नीचे पूजा करने से महिलाओं को ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों भगवान का आशीर्वाद मिलता है.

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