राहुल गांधी संसद में पड़ जाएंगे ‘अकेले’, लोकसभा चुनाव में इन 5 खास दोस्तों को मिली हार….मोदी लहर में सब हारे

राहुल गांधी संसद में पड़ जाएंगे ‘अकेले’, लोकसभा चुनाव में इन 5 खास दोस्तों को मिली हार

राहुल गांधी संसद में पड़ जाएंगे अकेले लोकसभा चुनाव में इन 5 खास दोस्तों को मिली हार
राहुल गांधी को अमेठी में बीजेपी प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने 55,120 वोटों के अंतर से हरा दिया है.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने गढ़ अमेठी से चुनाव हार गए हैं. हालांकि, राहुल अभी भी संसद पहुंचेंगे. दरअसल, उन्होंने केरल की वायनाड लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ा था. जहां उन्हें जीत हासिल हुई है.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) के नतीजे 2019 शुक्रवार को कई राज्यों में साफ हो चुके हैं. ‘प्रचंड मोदी लहर’ पर सवार होकर बीजेपी ने एक बार फिर से बहुमत का आंकड़ा छू लिया. वहीं, 2019 के चुनावी नतीजों पर नजर डालें तो, बीजेपी की यह जीत 2014 के आंकड़ों से भी आगे है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व के चलते लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha elections 2019) की 543 में 542 सीटों पर मतगणना के नतीजों में एक बार फिर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सत्ता में वापसी हुई है.

इन सबके बीच सबसे बड़ी खबर ये है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने गढ़ अमेठी से चुनाव हार गए हैं. राहुल गांधी को बीजेपी प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने 55,120 वोटों के अंतर से हरा दिया है. हालांकि, राहुल अभी भी संसद पहुंचेंगे. दरअसल, राहुल ने केरल की वायनाड लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ा था. जहां उन्हें जीत हासिल हुई है. वहीं, इस बार राहुल संसद में काफी अकेला महसूस करेंगे. इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण यह है कि उनके 5 दोस्त इस बार सांसद नहीं बन सके हैं. आइए जानते हैं कौन हैं राहुल गांधी के वो मित्र सांसद…

ज्योतिरादित्य सिंधिया
मध्य प्रदेश की गुना लोकसभा सीट से चार बार लगातार सांसद रहने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को पहली बार चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. सिंधिया को पहली बार चुनाव लड़ रहे बीजेपी के प्रत्याशी कृष्ण पाल यादव ने 1,25,549 मतों के अंतर से हरा कर उनसे यह सीट छीन ली है. गुना लोकसभा सीट पर सिंधिया राजघराने की तीन पीढ़ियों का कब्जा रहा और यह परिवार कोई चुनाव नहीं हारा था.

सिंधिया राजघराने के परिवार की तीन पीढ़ियों को गुना लोकसभा सीट से 14 बार सांसद के तौर जनता ने चुनकर भेजा है. सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी विजयाराजे सिंधिया 6 बार गुना से सांसद रहीं, तो उनके पिता माधवराव 4 बार चुने गए थे। ज्योतिरादित्य ने भी चार बार इस क्षेत्र का संसद में प्रतिनिधित्व किया.

दीपेंद्र सिंह हुड्डा
हरियाणा की रोहतक लोकसभा सीट से लगातार तीन बार सांसद रहने वाले दीपेंद्र सिंह हुड्डा को भी इस बार शिकस्त मिली है. दीपेंद्र सिंह हुड्डा को बीजेपी के प्रत्याशी अरविंद कुमार शर्मा ने 7,503 वोटों से हराया है. रोहतक सीट पर अबतक 16 बार लोकसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें 11 बार कांग्रेस को जीत हासिल हुई है.

जितिन प्रसाद
उत्तर प्रदेश की धौरारा लोकसभा सीट से पूर्व सांसद जितिन प्रसाद भी इस बार संसद का रास्ता तय नहीं कर पाए हैं. बीजेपी प्रत्याशी रेखा वर्मा ने धौरारा सीट पर जीत हासिल की है. वहीं, चौंकाने वाली बात यह है कि इस सीट पर हार के साथ जितिन प्रसाद तीसरे नंबर पर रहे हैं. उनसे आगे सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी अरशद इलियास सिद्दीकी दूसरे नंबर पर रहे हैं.

सुष्मिता देव
असम की सिलचर लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी सुष्मिता देव को भी हार का सामना करना पड़ा है. सुष्मिता देव कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की काफी करीबी मानी जाती हैं. सुष्मिता देव को बीजेपी के प्रत्याशी राजदीप रॉय ने 81,596 वोटों के अंतर से हराया है.

मिलिंद देवड़ा
महाराष्ट्र की दक्षिण मुंबई सीट से कांग्रेस प्रत्याशी मिलिंद देवड़ा भी इस बार सत्ता का गलियारा पार कर संसद नहीं पहुंच पाए हैं. मिलिंद देवड़ा को दक्षिण मुंबई सीट पर बीजेपी और शिवसेना गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी अरविंद गणपत सावंत ने 1,00,067 वोटों से पराजित किया है. बता दें कि मिलिंद देवड़ा को जीताने के लिए मुकेश अंबानी ने भी एक बयान दिया था.

इससे इतर बीजेपी ने पार्टी शासित प्रदेशों के साथ-साथ कांग्रेस और गैर कांग्रेस शासित राज्यों में भी अपना परचम लहराया है. बीजेपी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, यूपी और पश्चिम बंगाल तक में बेहतरीन प्रदर्शन किया है.

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