राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और लोक कल्याणकारी योजनाओं की तिकड़ी ने बीजेपी को दिलाई रेकॉर्ड जीत

राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और लोक कल्याणकारी योजनाओं की तिकड़ी ने बीजेपी को दिलाई रेकॉर्ड जीत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने रेकॉर्ड जीत हासिल की है। भारतीय जनता पार्टी ने अकेले अपने दम पर 300 का आंकड़ा पार कर लिया है। एनडीए के घटक दलों की सीटों की संख्या 350 से अधिक हो गई है।

हाइलाइट्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने 2019 लोकसभा चुनावों में हासिल की बड़ी जीत
शुरुआत से ही बीजेपी ने चुनावों में बढ़त हासिल की और अंत में इसे और बड़ा कर लिया
बीजेपी ने सिर्फ उत्तर प्रदेश में इतनी (62) सीटें जीतीं जितनी कांग्रेस ने पूरे देश में नहीं हासिल कीं
नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने लोकसभा चुनावों में जबर्दस्त जीत हासिल की है। मोदी ‘लहर’ के सामने विपक्षी कांग्रेस और क्षेत्रीय दल कहीं नहीं टिक पाए। बीजेपी ने यह चुनाव, राष्ट्रवाद, हिदुत्व और गरीबों के लिए चलाई गई सामाजिक योजनाओं के आधार पर लड़ा। पार्टी का पूरा चुनाव अभियान इन्हीं तीन मुद्दों पर लड़ा गया।

गुरुवार को मतगणना शुरू होने के कुछ ही देर बाद ही यह तस्वीर साफ होने लगी कि एक बार फिर मोदी सरकार बनने जा रही है। शुरुआती दो घंटों में ही बीजेपी ने 200 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बना ली थी। दिन खत्म होने तक बीजेपी ने अकेले उत्तर प्रदेश में उतनी सीटें हासिल कर लीं जितनी कांग्रेस पूरे देश में नहीं जीत पाई।

न तो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी के ‘महागठबंधन’ बीजेपी को यूपी में रोक पाया और न ही तृणमूल कांग्रेस और बीजू जनता दल जैसे क्षेत्रीय दल बीजेपी को रेकॉर्ड दूसरी बार जीतने से रोक पाए। मोदी के खिलाफ विपक्ष का राफेल, बेरोजगारी और किसानों की तकलीफ के मुद्दे बुरी तरह फ्लॉप रहे। मोदी ने अपने चुनाव अभियान में बालाकोट पर हुए एयर स्ट्राइक का खूब इस्तेमाल किया और इसका उन्हें फायदा भी हुआ।

कांग्रेस के ‘चौकीदार चोर है’ कैंपेन को व्यापक जनसमर्थन नहीं मिला और बीजेपी ने इसका करारा जवाब ‘मैं भी चौकीदार’ चलाकर दिया। बीजेपी ने ‘सेकुलरिज्म’ पर भी अपनी विचारधारा के जरिये जवाब दिया। पार्टी ने राष्ट्रदोह कानून से लेकर जम्मू-कश्मीर मसले और धार्मिक मामलों में न्यायिक दखलअंदाजी आदि मुद्दों के जरिए चुनौती दी। .

मोदी ने अपने कैंपेन में पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद का जवाब सैनिक कार्यवाही के जरिए देने को बड़ा मुद्दा बनया। कई लोगों ने इसे अंधराष्ट्रीयता बताकर इसकी आलोचना की। इसके साथ ही हिंदू प्रतीकों और थीम्स के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। गुरुवार को बीजेपी मुख्यालय में अपने विजयी भाषण में मोदी ने कहा कि यह फैसला नए भारत की उम्मीदों और आशाओं का फैसला है। साथ यह दिखाता है कि ‘सेकुलरिज्म’ के राजनीतिक इस्तेमाल के दिन अब लद चुके हैं।

लगातार दूसरी जीत के बाद यह साफ हो गया है कि बीजेपी अब भारतीय राजनीति की सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है।

मोदी ने 2019 के इस जनादेश को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा कि इससे दुनिया को स्तब्ध कर देगा। उन्होंने कहा, ‘राजनीतिक पंडितों को अब पिछली सदी के नियमों को अब भूलना होगा।’

बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में खाता भी नहीं खोल पाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेहनत को नजरअंदाज करने की कीमत चुकानी पड़ी है। उन्होंने कहा कि यह फैसला तुष्टिकरण और जाति व वंशवाद की राजनीति के खिलाफ है। उन्होंने मोदी को विश्व के सबसे लोकप्रिय जनतांत्रिक नेता भी करार दिया।

एनडीए की सीटों की संख्या करीब 350 तक पहुंच गई है। और इसके साथ ही बीजेपी ने स्वयं के लिए तय किया 300 सीटों का लक्ष्य भी हासिल किया। बीजेपी ने चुनावों से पहले नारा दिया था- ‘अबकी बार 300 के पार।’ शुरुआत में कई जानकारों का मानना था कि पार्टी के लिए यह लक्ष्य हासिल कर पाना काफी मुश्किल होगा। मोदी ने राजनीतिक पंडितों की उस सोच को धराशायी कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि पार्टी 2014 के अपने प्रदर्शन को दोहरा नहीं पाएगी। लेकिन पार्टी ने एक बार फिर राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सभी सीटों पर जीत हासिल की। इसकके अलावा मध्य प्रदेश में वह सिर्फ एक सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाई वहीं बिहार में भी उसने जेडीयू और रामविलास पासवान के गठबंधन के साथ मिलकर 40 में से 39 सीटों पर जीत हासिल की।

बीजेपी की उम्मीदवार प्रज्ञा ठाकुर, जो आतंकवाद से जुड़े एक केस में आरोपी हैं, ने कांग्रेस के दिग्गज दिग्विजय सिंह को भोपाल से हरा दिया। दिग्विजय सिंह ने कथित रूप से ‘हिंदू आतंकवाद’ का शब्द गढ़ा था और वह तभी से संघ परिवार के निशाने पर थे। इसके अलावा ‘आजादी’ वाले कन्हैया कुमार भी मोदी लहर के सामने टिक नहीं पाए और बेगूसराय से गिरिराज सिंह के खिलाफ उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

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