डेढ़ साल की मासूम से दुष्कर्म के दोषी को महज एक माह में सजा

डेढ़ साल की मासूम से दुष्कर्म के दोषी को महज एक माह में सजा

छत्तीसगढ़ में यह अब तक का सबसे तेजी से आने वाला फैसला है। दूसरे दिन गिरफ्तारी, चार दिन में विवेचना, 28वें दिन चालान पेश ।

रायपुर। डेढ़ साल की मासूम से दुष्कर्म के एक संवेदनशील मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने महज एक महीने के भीतर दोषी को सजा सुनाया। छत्तीसगढ़ में यह किसी भी कोर्ट सबसे तेज फैसला है। कोर्ट ने दोषी को 20 साल की सजा और 50 हजार पांच सौ रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

इस मामले में पुलिस ने पूरी तत्परता दिखाई। घटना के दूसरे ही दिन आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। चार दिनों में विवेचना पूरी कर 28वें दिन कोर्ट में चालान पेश कर दिया। प्रदेश में यह अब तक का सबसे तेजी से आने वाला फैसला है।

एसएसपी आरिफ शेख ने मंगलवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित पत्रकारवार्ता में बताया कि 25 फरवरी को तेलीबांधा इलाके में मजदूर परिवार की डेढ़ साल की मासूम को पास के फार्म हाउस में मजदूरी करने वाला मुकेश विश्वकर्मा (21) पुत्र सुमरन विश्वकर्मा साथ में खेलने की बात कह लेकर चला गया।

काफी देर बाद भी जब बच्ची नहीं लौटी तो मां खोजते हुए फार्म हाउस पहुंची। मुकेश का कमरा भीतर से बंद था। इस पर महिला को शक हुआ। उसने आवाज देकर दरवाजा खुलवाया तो बच्ची दूसरे कमरे में रो रही थी। मुकेश उसे लेकर बाहर आया। मां को देखते ही वह रोते हुए लिपट गई। बच्ची की हालत देख महिला ने शोर मचाना शुरू कर दिया। इससे घबराकर मुकेश भाग गया।

महिला बच्ची को लेकर तुरंत तेलीबांधा थाने पहुंची। वहां शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने मूलत : बलौदाबाजार जिले के ग्राम डोटेपार निवासी मुकेश के खिलाफ धारा 376, 442, 201 और पॉक्‍सो 4,5 (घ) (ड) के तहत रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस ने 27 फरवरी को मुकेश को गिरफ्तार कर लिया।

गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने केवल चार दिनों के भीतर इस गंभीर प्रकरण की विवेचना पूरी कर एक मार्च को सप्तम अतिरिक्त न्यायाधीश राजीव कुमार की अदालत में चालान पेश कर दिया। डीजीपी डीएम अवस्थी ने तगड़ी व तेज विवेचना के लिए पुलिस टीम को पुरस्कृत करने और एसएसपी आरिफ शेख ने विवेचना टीम को बतौर इनाम 10 हजार रुपये देने की घोषणा की है।

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