जेल में बेख़ौफ़ जारी वसूली का खेल…. जिला रामानुजगंज जेल में मुलाकातियों से वसूली की शिकायत

जेल में मुलाकातियों से लिए जा रहे पैसे

रामानुजगंज : सरकार के नियमानुसार जिला जेल रामानुजगंज में कैद बंदियों से मुलाकात करने वाले उनके परिवारों को सप्ताह…

रामानुजगंज : सरकार के नियमानुसार जिला जेल रामानुजगंज में कैद बंदियों से मुलाकात करने वाले उनके परिवारों को सप्ताह में एक दिन मिलने का प्रावधान है। लेकिन रामानुजगंज जिला जेल में इस नियम को ताक पर रखा जा रहा है। यहां पर जेल का मुख्य प्रहरी श्री दिवाकर के द्वारा चंद रुपये के चलते एक ही आदमी को सप्ताह में सातों दिन मिलाया जा रहा है। रामानुजगंज जिला जेल में छोटे-बड़े शीर्ष नक्सली सहित अन्य खूखार अपराधी बंद है। लेकिन सभी बातों को ताक में रखकर जिला जेल में सप्ताह में सातों दिन मुलाकाती कराई जा रही है। जिला जेल में निगरानी रखने के लिए जेल के बाहर और अंदर सीसी टीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। लेकिन इसको नजर अंदाज करते हुए मुख्य प्रहरी श्री दिवाकर पैसे लेकर मुलाकात करवाते हैं। पैसे देने वाले के लिए जेल में कोई नियम कानून नहीं बना हुआ है। वहीं पैसे नहीं देने वाले के साथ अच्छे से बात भी नहीं किया जाता है। यहां के कर्मचारी अवैध वसूली करके सभी नियमों को अपने जेब मे रख लेते हैं। और रुपयों के वजन में दबकर जेल के अंदर ना पंहुचने वाली सामग्री भी अंदर जाने दे रहे हैं। दरअसल जेल में कैदियों से मिलने आने वाले मुलाकातियों द्वारा लाए जाने वाले फल व मिठाई को अंदर पहुंचाने के नाम पर अवैध वसूली का खेल यहा वर्षो से जारी है। वैसे तो नियम और सुरक्षा के लिहाज से कैदियो एवं बंदियों के लिए आने वाले सामग्री की जांच करके ही अंदर भेजना उचित होता है। लेकिन सामान अंदर ले जाने के लिए अवैध पैसे भी लिए जाते हैं। मुख्य प्रहरी श्री दिवाकर के द्वारा बंदी के परिजनों से जबरन पैसा मांगा जाता है । पैसा नहीं देने पर परिजनों को दो से तीन घंटा बैठा कर रखा जाता है । पैसा नहीं देने वाले परिजनों के लिए दोपहर एक बजे मुलाकात खिडकी बंद कर दिया जाता है और पैसा देने वाले परिजनों के लिए शाम पांच बजे तक भी मुलाकात कराया जाता है । श्री दिवाकर के द्वारा जबरन पैसा मांगे जाने पर परिजनों में आक्रोश ब्याप्त है और उनके इस रवैये से बहुत सारे परिजन मुलाकात करना छोड़ दिये हैं जिस कारण जेल में बंद बंदियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है ।

सामान में भी होती है चोरी
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परिजनों द्वारा बंदी के लिए मुलाकात के दौरान दिये जाने वाले सामान भी सुरक्षित बंदियों तक नहीं पहुंच पाता है । जैसे काजू किशमिश और बादाम जैसे मंहगी आइटम श्री दिवाकर के द्वारा पहले ही गेट के बाहर चुरा लिया जाता है दो जोड़ी या चार जोड़ी कपड़े में से बंदी के पास मात्र एक जोड़ी पहुंच पाएगा कपडा क्रिम पावडर साबुन वगैरह गेट पर काम करने वाले कैदी एवं बंदियों द्वारा चुरा लिया जाता है और सामान का पर्ची बदल दिया जाता है । बंदी द्वारा सामान कम मिलने की शिकायत करने की कोशिश करने पर उनके साथ मार पीट की जाती है और बैरक ट्रांसफर कर प्रताड़ित किया जाता है । मार पीट के भय से बंदी के परिजन शिकायत नहीं करतें हैं । यदि कोई शिकायत कर दिया तो परिजन से संबंधित बंदी को लाल गेट पर बुलवा कर गाली ग्लौज सहित बेरहमी के साथ मार पीट की जाती है । बताया जाता है कि जेल कर्मियों के व्यवहार से छुब्द हो कर तथा इन्हीं दोहरी नीति के कारण दो दिन पूर्व बैरक नंबर 7 में एक विचाराधीन बंदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया है । बंदियों की माने तो अंगद के पांव के तरह वर्षों से जमे जेल मुख्य प्रहरी दिवाकर, सदाराम सिदार, सहित प्रहरी चन्द्रप्रकाश लकडा व जेलर मरकाम का स्थानांतरण आवश्यक है ।

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