फर्जी स्कूल के नाम पर चांवल घोटाला करने वाले कर्मचारियों पर शिक्षा विभाग मेहरबान क्यों…..??

*फर्जी माध्यमिक शाला के नाम पर घोटाला करने वालो को क्यो बचाने में लगे है अधिकारी!*

खरसिया !निकटस्थ ग्राम बड़े डूंमरपाली के पूर्व सरपंच एवं उपसरपंच ने शासन को चुना लगाने की मंशा से फर्जी माध्यमिक शाला कागजों में खोल दी और गजब तब हो गया जब शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन ने भी इस फर्जी माध्यमिक शाला को सभी तरह की अपनी सहमति देते हुवे,यहां फर्जी 82 बच्चो की दर्ज संख्या के हिसाब से बच्चों के मध्यान भोजन के लिए चावला आबंटित करना शुरु कर दिया इस बात की भनक जब इस क्षेत्र की जनपद सदस्य श्रीमती गिरजा बाई डनसेना को पता चला तो उसने स्थानीय प्रशासन सहित शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन में बैठे अधिकारियों से लिखित शिकायत कर इस फर्जी स्कूल तथा इसके मध्यान भोजन के माध्यम से चावल का घोटाला किए जाने की जांच की मांग की इसके बावजूद सन 2008 से 2011 तक 5 वर्षों तक लगातार चले इस फर्जी माध्यमिक शाला की जांच नहीं की गई, जनपद सदस्य श्रीमती गिरिजा देवी डनसेना ने फिर शिकायत की तब ततकॉलिंन जिलाध्यक्ष अमित कटारिया ने इसकी जांच करवाई किंतु यह जांच भी स्थानीय अधिकारियों की गलत कार्यशैली की वजह से 2011 से आज तक अधूरी ही पड़ी है जिसके चलते दोषी लोगों पर आज तक कोई कानूनी कार्यवाही किया जाना तो दूर घोटाला किए गए चावल की भी वसूली पूरी तरह पांच वर्षों में नहीं की जा सकी है जब तत्कालीन कलेक्टर अमित कटारिया ने आदेश जारी कर पत्र क्रमांक 2120 मध्यान भोजन शिकायत दिनांक 6/5 /2011 में लिखा था, कि उक्त चावल घोटाले की जांच कर चावल की रिकवरी की जाए लेकिन इस आदेश को भी इन अधिकारियों ने शायद ज्यादा तरजीह नही दी और आठ वर्षों में जांच करता अधिकारी ने खाना पूर्ति करने के लिए केवल 44 क्विंटल चावल ही रिकवरी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री समझ ली इसके अलावा शिक्षा विभाग के शक्षम अधिकारियों ने दोषी लोगों के खिलाफ ना ही कोई आपत्ति दर्ज कराई और ना ही कोई एफ आई आर दर्ज करवाई हद तो तब हो गई जब स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने इस फर्जी और कागजी माध्यमिक शाला के लिए लाखों की लागत से एक भवन भी बनवा दिया इसपर ग्रामीणों का कहना है, कि आज तक हमें यह नहीं मालूम कि यह लाखों की लागत से बना भवन किस मद से और किस उद्देश्य से बनाया गया है, यही वजह है,की आठ वर्षों में इस भवन में एक दिन भी बच्चों की पढ़ाई नहीं कराई गई है वही जब इस विषय में जांच करता अधिकारी राधेश्याम शर्मा से पूछा गया उन्होंने बताया कि मैंने अपने बूते पर जांच कर 44 क्विंटल चावल की रिकवरी करवाई है और आगे जांच करवा कर शेष रिकवरी करवाई जाएगी जबकि वर्तमान रॉबर्टसन संकुल प्रभारी टेकलाल पटेल से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि यहां दो माध्यमिक शालाओ के नाम पर चावल का आवंटन किया जाता था लेकिन मेरी जानकारी में 2008 से आज तक यहां केवल एक ही माध्यमिक शाला का संचालन किया जा रहा है!

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