#Balakot में भारत को एयर स्ट्राइक से क्या मिला

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पिछले महीने 14 फ़रवरी को भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा ज़िले में सीआरपीएफ़ के एक काफ़िले पर जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमले में 40 जवानों के मारे जाने के बाद भारत ने 26 फ़रवरी को पाकिस्तान में चरमपंथी संगठनों के ठिकानों को निशाने पर लिया था.

भारत ने यह कार्रवाई पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तुनख़्वा प्रांत के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर की थी.

कहा जा रहा है कि भारत ने यह हमला मिराज 2000 लड़ाकू विमान से किया था और ये 12 की संख्या में गए थे. इससे पहले 1971 के युद्ध में भारतीय सेना पाकिस्तानी सीमा में घुसी थी.

24 घंटे के भीतर ही पाकिस्तान ने 27 फ़रवरी को या तो एफ़-16 या जेएफ़-17 से एक भारतीय मिग-21 लड़ाकू विमान मार गिराया.

कहा जा रहा है कि पाकिस्तानी एयरक्राफ़्ट नियंत्रण रेखा के पार भारत प्रशासित कश्मीर में घुस आए थे और बमबारी की थी. भारत ने ये भी दावा किया कि उसने पाकिस्तान के एफ़-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया था.

आतंकवाद से लड़ने के लिए वायुसेना का इस्तेमाल करने का भारत के फ़ैसले को अहम माना जा रहा है. लेकिन पाकिस्तान की तरफ़ से 24 घंटे के भीतर मिले जवाब के बाद भारत का यह फ़ैसला कितना उचित रहा?

पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई में भारत का एक मिग गिरा और एक पालयट को गिरफ़्तार कर लिया.

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जाने-माने रक्षा विशेषज्ञ राहुल बेदी कहते हैं अगर चुनाव के लिहाज से देखें तो मोदी सरकार के हक़ में यह फ़ैसला जाता दिख रहा है लेकिन सुरक्षा रणनीति के नज़रिए से देखें तो यह बहस का विषय है.

राहुल बेदी कहते हैं, ”पाकिस्तान ने भारत को 24 घंटे के भीतर ही जवाब ज़रूर दिया लेकिन भारत के भीतर लोगों की धारणा मोदी के पक्ष में रही. लेकिन सुरक्षा की रणनीति के नज़रिए से देखें तो यह बहुत ख़तरनाक मालूम पड़ता है. दो परमाणु शक्ति संपन्न देश एक दूसरे की सीमा में फाइटर प्लेन के साथ घुसे. पिछले सात दशक में मुझे ऐसा कोई वाक़या नहीं याद आ रहा है. मोदी ने जो क़दम उठाया है और इस पर आगे बढ़ते रहे तो सोचकर ही डर लगता है.”

राहुल बेदी का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ एयर स्ट्राइक करके भी देख लिया लेकिन इसके नतीजे क्या मिले अभी तक साफ़ नहीं है.

बालाकोट

बेदी कहते हैं, ”36 घंटे के भीतर भारतीय वायुसेना के पायलट का भारत आना मोदी के पक्ष में गया, लेकिन अगर फिर आतंकी हमला हुआ तब मोदी के पास क्या विकल्प हैं? मुझे कोई विकल्प नहीं दिखता है. भारत की एयर स्ट्राइक का जवाब पाकिस्तान ने भी वैसै ही दिया. ऐसे में भारत फिर एयर स्ट्राइक करेगा, ऐसा नहीं लगता. अभी भारत की वायुसेना भले पाकिस्तान से थोड़ी मज़बूत है लेकिन आने वाले तीन-चार सालों में ऐसा नहीं रहेगा. अब भारत के लिए यह अहम सवाल है कि फिर से आतंकी हमला हुआ तो भारत क्या करेगा?”

भारत में वायुसेना के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है. भारत जिन लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर रहा है उसकी तकनीक वक़्त के साथ पुरानी पड़ गई है. रक्षा विशेषज्ञ मिग को भारत के आसामान का ताबूत कहते हैं.

ऐसे में भारत की वायुसेना पाकिस्तान को किस हद तक चुनौती देगी? यहां तक कि भारत के सेना प्रमुख ढाई मोर्चे से युद्ध की बात करते हैं. मतलब पाकिस्तान के साथ जंग की स्थिति बनी तो चीन के रुख़ को लेकर भारत की चिंता बनी रहती है.

बालाकोट स्ट्राइक के बाद क्या?

भारतीय वायुसेना के पास महज 32 स्क्वैड्रन हैं जबकि सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कम से कम 42 स्क्वैड्रन होने चाहिए. 32 में से भी कई स्क्वैड्रन लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रहे हैं. एक स्क्वैड्रन पर कम से कम 16 से 18 लड़ाकू विमान होने चाहिए.

मिग-21 में 1960 के दशक की सोवियत संघ वाली तकनीक है और आज भी इसका इस्तेमाल करता है. भारत के 6 स्क्वैड्रन आज भी मिग-21 के सहारे हैं. भारतीय वायुसेना ने अपने घर में बनाए लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) को भी शामिल किया है.

फ़्रांस के साथ रफ़ाल लड़ाकू विमानों का सौदा भी भारतीय एयरफ़ोर्स के अहम है. एलसीए को बनाने में भारत ने कम से कम तीन दशक के वक़्त लिए हैं. मार्च 2019 से सिर्फ़ 16 एलीसए एयर फ़ोर्स में शामिल होंगे. अब भी भारतीय वायुसेना अडवांस फाइटर प्लेन के लिए जूझ रही है.

हवाई हमले पर क्या बोले बालाकोट के लोग?

भारत से 11 स्क्वैड्रन पर रूसी सुखोई-30 एमकेआई फाइटर प्लेन हैं. ये दुनिया के आधुनिकतम फाइटर प्लेनों में से एक हैं.

भारत के तीन स्क्वैड्रन पर मिराज 2000 ई/ईडी/आई/आईटी, चार स्क्वैड्रन पर जगुआर आईबी/आईएस और तीन स्क्वैड्रन पर मिग-27 एमएल/मिग-23यूबी हैं.

स्क्वैड्रन और फ़ाइटर प्लेन के लिहाज़ से देखें तो भारतीय वायुसेना पाकिस्तान से बेहतर स्थिति में है. भारत के पास मिग-29, Su-30MKI और मिराज-200 हैं. वहीं पाकिस्तान के पास सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान एफ़-16 और जेएफ़-17 है. एफ़-16 अमरीका में बना है और जेएफ़-17 को चीन और पाकिस्तान ने मिलकर बनाए हैं.

पाकिस्तान की अभी जैसी आर्थिक स्थिति है वैसे में उसके लिए वायुसेना को मज़बूत बनाना आसान नहीं है. अगर पाकिस्तान के साथ चीन आ गया तो भारत के लिए मुश्किल स्थिति होगी.

चीन अपनी सेना का आधुनीकीकरण तेज़ी से कर रहा है. द मिलिटरी बैलेंस 2019 के अनुसार चीन के पास कुल 2,413 हमलावर लड़ाकू विमान हैं और भारत के पास महज 814 जबकि पाकिस्तान के पास 425 हैं.

हालांकि कई विशेषज्ञ इस बात को मानते हैं कि चीन अपनी सेना का आधुनीकीरण भारत के लिए नहीं बल्कि अमरीका और जापान को नज़र में रखते हुए कर रहा है.

सुरक्षा विशेषज्ञों का ये भी मानना है कि चीन अपने लिए भारत को ख़तरा नहीं मानता है. द डिप्लोमैट की एक रिपोर्ट के अनुसार अगर भारत और पाकिस्तान की जंग में चीन पाकिस्तान की मदद भी करेगा तो सीमित मदद देगा, लेकिन पाकिस्तान अपनी पूरी ताक़त झोंक देगा.

अगर पाकिस्तान के साथ चीन आता है तो बाक़ी देशों के बीच गोलबंदी शुरू होगी. अभी अमरीका और जापान भारत के क़रीब हैं. ऐसे में भारत को अमरीका और जापान से मदद की उम्मीद रहेगी. जापान और चीन में ऐतिहासिक दुश्मनी रही है और हर बार चीन को मुंह की खानी पड़ी है.

भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को इंडिया टीवी के एक कार्यक्रम में कहा है कि भारत ने 1971 के युद्ध के बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय सीमा पार किया. जेटली ने कहा, ”हमारे प्रधानमंत्री ने नीति बदली है. पहले की सरकारें अपना इंटेलिजेंस और सुरक्षा बलों को चाक चौबंद करती थीं ताकि हमले को रोका जा सके. हम अब दो क़दम आगे बढ़ गए हैं.”

जेटली ने कहा, ”हमारी नीति है कि जहां आतंकी तैयार किए जा रहे हैं वहीं हमला किया जाए. पाकिस्तान का न्यूक्लियर ब्लफ़ भी अब सामने आ गया है. भारत की सेना सक्षम है और आतंक के ख़िलाफ़ जवाब देने में तत्पर रहेगी.”

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राहुल बेदी कहते हैं कि देश-दुनिया की एजेंसियों ने जो सैटलाइट तस्वीरें जारी की हैं उनसे तो यही पता चलता है कि एयर स्ट्राइक निशाने पर नहीं गई.

बेदी मानते हैं कि भारत की एयर स्ट्राइक का लेकर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय अवधारणा अलग-अलग हैं. राष्ट्रीय अवधारणा मोदी के पक्ष में है और अंतरराष्ट्रीय अवधारणा ये है कि भारत की स्ट्राइक नाकाम रही.

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