”हम अनुभव कर रहे हैं कि हिंदुओं की लगातार उपेक्षा हो रही है”: RSS

”राज्य सरकार ने गैर-हिंदू और गैर-भक्त महिलाओं के जबरन प्रवेश की सुविधा देकर हिंदू समाज के प्रति अनुचित जल्दबाजी और राजनीतिक दुर्भावना दिखाई.”

''हम अनुभव कर रहे हैं कि हिंदुओं की लगातार उपेक्षा हो रही है'': RSS
फाइल फोटो

ग्वालियरः सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या विवाद के समाधान के लिए मध्यसस्थता समिति बनाए जाने के बीच ग्वालियर में शुरू हुई राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की की तीन विदसीय बैठक में राम मंदिर जल्द से जल्द बनाए जाने की चर्चा पर जोर दिया गया, जहां संघ के सदस्यों ने राम मंदिर निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर किए जाने की पहल पर बात-चीत की. राम मंदिर निर्माण पर अपनी बात रखते हुए RSS ने कहा कि ”राम-जन्मभूमि मामले में, लंबे खींचे गए विवाद को समाप्त करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने के बजाय, सुप्रीम कोर्ट ने एक अजीबो-गरीब रुख अपनाया है. हिंदू समाज की गहरी आस्था से जुड़े इस संवेदनशील विषय को सर्वोच्च न्यायालय ने कोई प्राथमिकता नहीं दी है.”

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संघ के वक्ताओं ने आगे कहा कि ”हम अनुभव कर रहे हैं कि हिंदुओं की लगातार उपेक्षा हो रही है. न्यायिक प्रणाली का पूरा सम्मान करते हुए, हम सशक्त रूप से यह कहना चाहेंगे कि विवाद पर निर्णय शीघ्र होना चाहिए और राम मंदिर निर्माण में आने वाली बाधाओं को दूर करना चाहिए. वहीं सबरीमाला मुद्दे पर चर्चा करते हुए संघ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित संस्थाओं और रीति-रिवाजों को अनदेखा करते हुए पीठ की अकेली महिला सदस्य की राय लिए बिना निर्णय दिया.

 

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुताबिक किसी भी निर्धारित समय सीमा में निर्णय को लागू करने के लिए राज्य सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं था, लेकिन निर्णय की बारीकियों को समझे बिना, राज्य सरकार ने गैर-हिंदू और गैर-भक्त महिलाओं के जबरन प्रवेश की सुविधा देकर हिंदू समाज के प्रति अनुचित जल्दबाजी और राजनीतिक दुर्भावना दिखाई. वहीं अयोध्या विवाद की मध्यस्थता के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति का अध्यक्ष बनाए जाने पर कलीफुल्ला ने कहा, “मैं इस समय बस इतना कह सकता हूं कि अगर सर्वोच्च न्यायालय ने समिति गठित की है तो हम विवाद को सौहार्दपूर्वक सुलझाने की हर कोशिश करेंगे.”

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वहीं समिति का सदस्य नियुक्त किए जाने के बाद श्री श्री रविशंकर ने कहा, “हर किसी का सम्मान करने, सपनों को साकार करने, लंबे समय से लंबित विवाद को खुशी-खुशी समाप्त करने और समाज में सदभाव बनाए रखने के लिए हम सभी इन लक्ष्यों की ओर एकसाथ आगे बढ़े.”

 

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