नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर और विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 97541 60816 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , सुप्रीम कोर्ट के जज को याचिकाकर्ता ने कह दिया आतंकी, शीर्ष अदालत ने कहा- जेल भेजूंगा तो समझ जाएंगे – पर्दाफाश

पर्दाफाश

Latest Online Breaking News

सुप्रीम कोर्ट के जज को याचिकाकर्ता ने कह दिया आतंकी, शीर्ष अदालत ने कहा- जेल भेजूंगा तो समझ जाएंगे

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

सुप्रीम कोर्ट के जज को याचिकाकर्ता ने कह दिया आतंकी, शीर्ष अदालत ने कहा- जेल भेजूंगा तो समझ जाएंगे

 

उसने सुप्रीम कोर्ट के जज को ही आतंकी कह दिया। सोचिए मुकदमा लड़ने गए वादी ने देश की सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश को आतंकवादी बता दिया जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उसे जेल भेजने की चेतावनी दी। सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायाधीश को आतंकी कहे जाने पर नाराजगी जताई और कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया।

नई दिल्ली: एक व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट के एक जज को आतंकवादी कह दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और रजिस्ट्री को उसे कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने वादी द्वारा लगाए गए आरोपों को अपमानजनक करार देते हुए कहा, ‘आपको कुछ महीने के लिए जेल भेजना होगा, तब आपको एहसास होगा।’

सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देने वाले ने ही जज को कहा- आतंकवादी
सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने उस व्यक्ति की आलोचना की और कहा, ‘आप उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश पर यूं ही कोई आरोप नहीं लगा सकते हैं।’ सुप्रीम कोर्ट सर्विस के एक लंबित मामले में एक व्यक्ति की अर्जी पर सुनवाई कर रहा था। अर्जी देने वाले व्यक्ति की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि वह उसका प्रतिनिधित्व तभी करेंगे, जब वह माफी मांगेगा। व्यक्ति ने कहा, ‘मैं माफी मांगता हूं।’ उसने कहा कि वह उस वक्त अत्यधिक मानसिक पीड़ा से गुजर रहा था, जब उसने अर्जी दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे

पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘यह अपमानजनक है।’ सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, ‘हम आपको इस बारे में कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे कि आप पर क्यों नहीं आपराधिक अवमानना का मुकदमा चलना चाहिए।’ बेंच ने कहा, ‘हम अर्जी की समय पूर्व सुनवाई के इच्छुक नहीं है। अर्जी खारिज समझी जाए।’ पीठ ने अपने आदेश में कहा कि वह व्यक्ति को अपने आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देने के सिलसिले में एक हलफनामा दाखिल करने के वास्ते तीन हफ्ते का वक्त देती है।

 

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

लाइव कैलेंडर

August 2025
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031