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*छत्तीसगढ़–धरमजयगढ़ जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत भंवरखोल के आश्रित ग्राम सेमीपाली खुर्द में जानवर और इंसान दोनो पी रहे हैं खुले ढोढ़ी का पानी,स्थानीय अधिकारियों जनप्रतिनिधियों की उदासीनता व निष्क्रियता का दंश झेल रहे भोले भाले ग्रामीण*

*धरमजयगढ़ जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत भंवरखोल के आश्रित ग्राम सेमीपाली खुर्द में जानवर और इंसान दोनो पी रहे हैं खुले ढोढ़ी का पानी*।

@*अभी तक पक्की सड़क का भी नही हो पाया है निर्माण मूलभूत सुविधाओं का नहीं मिल रहा लाभ*

*असलम खान धरमजयगढ़ ब्यूरो*:-

जनपद पंचायत धरमजयगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत भंवरखोल के आश्रित ग्राम सेमीपाली खुर्द के ग्रामवासी कोरोना काल में खुले आसमान के नीचे स्थित ढोढी का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं ।यहां की निर्दोष जनता संबंधित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय अधिकारी कर्मचारी की उदासीनता एवम निष्क्रियता का दंश झेल रहे हैं।और सेमीपाली खुर्द के ग्रामवासी मूलभूत सुविधाओं से दो चार होने मजबूर हो रहे हैं।

बताना लाज़िमी है के धरमजयगढ़ नगर से यह आश्रित ग्राम बमुश्किल 5 किलोमीटर दूर ऊंचाइयों पर स्थित है।कहने का तात्पर्य पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है।यहाँ के बाशिन्दे लोग पथरीली कच्चे रास्ते का उपयोग एक जमाने से करते आ रहे हैं। अर्थात पहाड़ी पथरीली रास्ते से आवाजाही करते हैं।अलबत्ता गांव में बिजली तो पहुंच गई है ,लेकिन वह भी नाम मात्र के लिए ,हमेशा गांव में बिजली हाफ रहता है, या फिर बिजली रहती ही नहीं है।फिलहाल यहां की मुख्य समस्या पेयजल को लेकर है ,पीने के पानी के लिए ग्रामवासी नाले में स्थित ढोढ़ी पर निर्भर हैं।

ग्रामवासी धरमसाय ,जोसेफ एक्का ,सुरित राम और राजकुमार का कहना है कि ग्राम सेमीपाली में 30 से 35 घर के लोग रहते हैं,और तकरीबन 50 से 55 परिवार यहाँ निवासरत है। यहाँ गांव से आने जाने के लिए सड़के नही है जिस वजह से ग्रामवासियों को आवागमन हेतु खासा परेशानी उठानी पड़ रही है।और गांव की सबसे अहम समस्या पेयजल की है ।ग्राम में बेशक़ 3 सरकारी हैंडपंप हैं लेकिन मौजूदा समय मे दो हैण्डपम्प काफी समय से बिगड़ा पड़ा हुआ है।ले देकर एक हैण्डपम्प है उसमें भी सहीं पानी नही आता ,नही के बराबर है।

लिहाजा इन मायनों में ग्रामवासी की माने तो वे सरपंच ,सचिव एवं संबधित अधिकारी कर्मचारियों से समस्या को लेकर कई बार गुहार लगा चुके हैं,लेकिन बड़ी विडंबना की बात है के समस्या अब तलक जस की तस बनी हुई है। इन हालातों में ग्रामवासियों का कहना है की पेयजल के लिए विकल्प बतौर गांव के करीब ही नाले में ढोढ़ी बनाकर पूरे ग्रामवासी किसी तरह अपनी प्यास बुझा रहे हैं।

बहरहाल सेमीपाली खुर्द की यह तस्वीर कहीं न कहीं शासन प्रशासन की विकास के दावे की पोल खोलने के लिए काफी है।जहां जानवर और इंसान एक ही खुले ढोढ़ी का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

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