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*एसकेएस पावर प्लांट के विरुद्ध आंदोलन कर रहे कांग्रेसियों पर दर्ज हुआ एफआईआर* *आंदोलनकारियों पर बलवा का मामला दर्ज होते ही मोबाइल हुआ बंद।एसकेएस के मुख्य सुरक्षा अधिकारी के शिकायत पर दर्ज हुआ मामला।*

*एसकेएस पावर प्लांट के विरुद्ध आंदोलन कर रहे कांग्रेसियों पर दर्ज हुआ एफआईआर*

*आंदोलनकारियों पर बलवा का मामला दर्ज होते ही मोबाइल हुआ बंद*

*एसकेएस के मुख्य सुरक्षा अधिकारी के शिकायत पर दर्ज हुआ मामला*

*थाना प्रभारी ने कहा जांच जारी,आरोपियों की जल्द होगी गिरफ्तारी*

*जिला पंचायत सदस्य अवध पटेल का दांवा आंदोलनकारियों का कांग्रेस से नही है नाता,भाजपाई है आंदोलनकारी*

*ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मनोज गबेल ने कहा मुझे नही है मामले की जानकारी*

रायगढ़

।खरसिया तहसील के ग्राम दर्रामुड़ा में स्थित एसकेएस पावर प्लांट के खिलाफ आंदोलन करना क्षेत्रीय ग्रामीणों एवं कांग्रेस नेताओं को पड़ा महंगा।मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर दर्जनों आंदोलनकारियों पर बलवा सहित अन्य धाराओं में हुआ अपराध दर्ज।

आंदोलकारियों के द्वारा पावर प्लांट का उत्पादन रोके जाने से पावर प्लांट को करोड़ों रुपए की आर्थिक क्षती पहुची है।प्राप्त जानकारी के अनुसार दर्रामुड़ा क्षेत्र के दर्जनों ठेकेदार पंद्रह सूत्रीय मांगों को लेकर एसकेएस पावर प्लांट के मुख्य गेट के सामने विगत 7 मार्च से धरना प्रदर्शन पर बैठ थे।

आंदोलनकारियों द्वारा अपनी पंद्रह सूत्रीय मांगों को पूरा करने जिला कलेक्टर रायगढ़ उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल एसडीएम खरसिया,पुलिस अधीक्षक रायगढ़,थाना प्रभारी भूपदेवपुर को लिखित आवेदन के माध्यम से पंद्रह सूत्रीय मांगों को पूरा करने के लिए 23 फरवरी 2021 को लिखित में ज्ञापन सौपा था।एवं 10 दिन के भीतर उक्त मामलों के निराकरण के लिए लिखा था।

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ग्राम पंचायत दर्रामुड़ा के सरपंच एवं जनपद सदस्य सहित दर्जनों आंदोलनकारियों के हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन पर 10 दिवस के भीतर कार्यवाही की मांग की गयी थी।किंतु क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों अथवा जिला प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा उक्त मांगो पर गंभीरतापूर्वक विचार न करने के कारण आक्रोशित ठेकेदारों के द्वारा स्थानीय ग्रामीणों एवं मजदूरों के सहयोग से धरना प्रदर्शन एवं आंदोलन पर 7 मार्च से एसकेएस पावर प्लांट के गेट के सामने बैठ गए।

स्थानीय प्रशासन द्वारा प्लांट प्रबंधन एवं आंदोलनकारियो के बीच कई बार बैठकों का दौर चला किंतु बैठक में कोई निर्णय नही हो पाया।लगातार चल रहे आंदोलन के कारण जहा एसकेएस कंपनी को प्रतिदिन लगभग ढाई करोड़ का नुकसान सहित तीन राज्यों छत्तीसगढ़,बिहार एवं राजस्थान को किए जा रहे विधुत आपूर्ति में व्यवधान का सामना भी करना पड़ा है।जिस कारण स्थानीय सुरक्षा गार्डों के सहयोग से एसकेएस पावर प्लांट के अधिकारियों द्वारा प्लांट के संचालन के लिए अपने निजी बस के माध्यम से कर्मचारियों एवं अधिकारियों को प्लांट के भीतर लाने का प्रयास करने पर स्थानीय आंदोलनकारी उग्र एवं आक्रोशित हो गए।उनके द्वारा ड्यूटी में जा रहे अधिकारी,कर्मचारियों को न सिर्फ रोका बल्कि उनके साथ मे गाली गलौच एवं हुज्जत बाजी भी की गयी। तथा उन्हें प्लांट में काम और जाने से रोका गया।जिस संबंध में प्लांट के मुख्य सुरक्षा अधिकारी मनोज कुमार उपाध्याय के लिखित शिकायत पर दिनांक 9 मार्च 2021 को मुकेश पटेल,छोटे लाल पटेल,टेकलाल पटेल,दिगंबर पटेल,लव पटेल, कुश पटेल, सनद डनसेना,रोहड़ी पटेल,हिन्दू पटेल सहित अन्य साथियों के विरुद्ध धारा 147,149,341,294,506 के तहत अपराध दर्ज किया गया।

किंतु उक्त आरोपियों के विरुद्ध भूपदेवपुर थाना प्रभारी एवं खरसिया पुलिस द्वारा किसी प्रकार की गिरफ्तारी एवं प्रतिबंधात्मक कार्यवाही नही किये जाने के कारण उक्त आंदोलनकारियों के हौसले बुलंद हो गए।अपनी मांगे पूरी न होते देख आक्रोशित आंदोलनकारियों के द्वारा दोबारा एसकेएस पावर प्लांट के 2 इंजीनियर संतोष देशमुख एवं मिलिन गुप्ता को रोककर 10 मार्च 2021 को पुनः तथाकथित कांग्रेस नेता मुकेश पटेल,छोटेलाल पटेल(भाजपा नेता),देवानन्द पटेल, पीताम्बर पटेल, दिगंबर पटेल एवं अन्य के द्वारा कालर पकड़कर उक्त इंजीनियरो को न सिर्फ मारपीट की बल्कि गाली गलौच करते हुए आंदोलनकारीयो के द्वारा घसीट कर उन्हें आंदोलन स्थल टेंट तक लेजाया गया।उक्त वारादात पावर प्लांट की सीसीटीवी कैमरे में कैद है।जिसके संबंध में उक्त घटना के आरोपियों के विरुद्ध क़ानूनी कार्यवाही करने एसकेएस प्लांट के मुख्य सुरक्षा अधिकारी मनोज उपाध्याय द्वारा दोबारा लिखित शिकायत दिए जाने पर आंदोलनकारियों के विरुद्ध एक अन्य प्रकरण धारा 147,149,341,294,506 के तहत मामला दर्ज किया गया।

किंतु उक्त घटना के 72 बीत जाने के बाद भी बिहार,झारखंड से आरोपियों को 1 दिन में ढूंढकर ले आने वाली रायगढ़ जिले की पुलिस कोई कार्यवाही नही कर सकी है।जिससे जहा एक ओर आरोपियों के हौसले बुलंद है वही माननीय सुप्रीम कोर्ट के द्वारा विधुत आपूर्ति जिसे अत्यंत आवश्यक सेवा माना गया है के उत्पादन पर विराम लग गया है जिसका खामियाजा एसकेएस पावर प्लांट प्रबंधन को प्रतिदिन लगभग ढाई करोड़ के आर्थिक क्षती के साथ निर्धारित अनुबंध के अनुसार सप्लाई नही कर पाने के कारण पेनाल्टी का भुगतान भी प्लांट प्रबंधन को करना होगा।

*आखिर बलवाकारियो पर क्यों मेहरबान है स्थानीय प्रशासन*

आपको यह बताना जरूरी है कि एसकेएस पावर प्लांट के स्थापना एवं जनसुनवाई के पूर्व स्थानीय ग्रामीणों एवं असामाजिकतत्वों के द्वारा भूषण पावर प्लांट के अधिकारियों एवं स्थानीय तत्कालीन एसडीएम प्रवीण मिश्रा एवं एसडीओपी जे.एस राखडा के साथ मारपीट करते हुए प्लांट के अधिकारियों के मुह में कालिक पोतकर न सिर्फ उन्हें चड्डी बनियान में घुमाया गया था प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ तक तोड़ दिए गए थे।

उक्त शर्मसार कर देने वाली भयावह घटना से सबक लेने के बजाए स्थानीय प्रशासन आखिर इन आंदोलनकारियों पर क्यों मेहरबान है यह समझ से परे है जबकि सभी के नाम पर नामजद fir दर्ज है एक के बाद कार्यवाही नही होने पर दूसरी घटना को अंजाम दे दिया जाता है उसके बाद भी मजलूमों पर अतिशीघ्र कार्यवाही करने वाली पुलिस प्रशासन के नाक के नीचे आंदोलन अनवरत जारी है,दंगाइयों पर कार्य वाही नही होने का क्या कारण हो सकता है आखिर दंगाइयों पर पुलिस क्यों मेहरबान है यह सोचनीय है।

*ठेकेदारों के वर्चस्व के लड़ाई में पिस रहे मजदूर एवं ग्रामीण*

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार एसकेएस पावर प्लांट के स्थापना के समय से ही राजनीतिक दल के ठेकेदारों के द्वारा सत्ता का धौस दिखाकर आर्थिक लाभ लेने इस प्रकार से प्रायोजित मांग एवं मुद्दों के साथ आंदोलन की आड़ में हमेशा अपनी राजनीतिक रोटी सकते आए है।जिसका खामियाजा रोजी मजदूरी करके अपने परिवार के पेट पालने वाले स्थानीय मजदूरों एवं ग्रामीणों को हमेशा से भोगना पड़ा है।पंद्रह साल तक छत्तीसगढ़ में भाजपा के सरकार में जहा स्थानीय बीजेपी नेता शोभाराम नायक एवं छोटेलाल पटेल के द्वारा ठेकेदारी की आड़ में सत्ता की मलाई का स्वाद खूब लिया गया।जैसे ही छत्तीसगढ़ राज्य में कांग्रेस की सरकार ने कमान सम्हाला बीजेपी नेता छोटेलाल पटेल पर्दे के पीछे आकर स्थानीय कांग्रेस नेता एवं अपने आप को उच्चशिक्षा मंत्री उमेश पटेल के बहुत करीबी बताने वाले मुकेश पटेल के साथ मिलकर एसकेएस पावर प्लांट में लंबे समय से कोयला, रेत,फ्लाईएस की भारी वाहन क्रेन, हाइड्रा,जेसीबी,पोकलेन किराया में देने के साथ-साथ लेबर सप्लाई का कार्य करते आ रहे है।जो वर्तमान में क्षेत्र के निर्वाचित डीडीसी महोदय को रास नही आ रहा है।सूत्रों की माने तो लगातार दूसरी बार जिला पंचायत सदस्य पर काबिज नेता जी अवध पटेल कांग्रेस की सत्ता सरकार में एसकेएस पावर प्लांट में अपना सिक्का चलाना चाहते है।यही कारण है कि ग्रामीणों एवं मजदूरों को अधिकार दिलाने की आड़ में बार-बार प्लांट को बंद कराके आंदोलन का यह खेल खेला जा रहा है।

*मुकेश पटेल है नाम का कांग्रेसी है भाजपाई,गलत मांगो के साथ आंदोलनकारी कर रहे तानाशाही;अवध नारायण पटेल जिला पंचायत सदस्य खरसिया*

जब इस आंदोलन के बारे में जिला पंचायत सदस्य एवं दिग्गज कांग्रेस नेता अवध पटेल से उक्त आंदोलन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने आंदोलन में किये जा रहे मांग को गलत ठहराते हुए आंदोलनकारियो को तानाशाही कहते हुए कहा कि आंदोलनकारी नाम मात्र के कांग्रेसी है वैसे तो ये सभी भाजपाई है आंदोलनकारियो के विरुद्ध बलवा का अपराध दर्ज किया गया है।बिंजकोट के ग्रामीणों की जायज मांगो को प्रबंधन द्वारा पूरा करने पर आंदोलनकारियो द्वारा कंपनी के पूर्व अधिकारी पॉलसन एवं रायपुर के गुप्ता के साथ मिलकर कंपनी को नुकसान पहुचाने एवं प्रायोजित तरीके से वर्तमान में कंपनी के संचालन करने वाले बैंक के हाथ से कंपनी को हथियाने के लिए उक्त आंदोलन की आड़ में उत्पादन बंद करवाया गया है जो कि चिंताजनक है

*मुझे नही है कांग्रेसियों पर अपराध दर्ज होने की जानकारी;मनोज गबेल(अध्यक्ष ब्लाक कांग्रेस कमेटी)*

जब दर्रामुड़ा क्षेत्र के आंदोलनकारी कांग्रेस नेताओं के विरुद्ध भूपदेवपुर थाना में बलवा अपराध के दो-दो प्रकरण दर्ज होने के संबंध में पूछा गया तो नेता जी द्वारा खुद को मामले से अंजान बताते हुए पता करके बताता हूं मुझे इस मामले में जानकारी नही है कहकर जवाब दिया गया।

*क्या कहते है अधिकारी*

जब इस बारे में खरसिया एसडीएम गिरीश राम टेके से जानकारी चाही गई तो उनके द्वारा खुद को जन सुनवाई कार्यक्रम में होना बताया गया।

जब एसकेएस पावर प्लांट के उत्पादन बंद कर बलवा करने वाले आंदोलनकारियो के गिरफ्तारी के संबंध में की गयी कार्यवाही के सवाल पर जांच एवं बयान के बाद कार्यवाही की बात कही गई।

जब रिपोर्टकर्ता एसकेएस पावर के मुख्य सुरक्षा अधिकारी मनोज उपाध्याय से घटना के बारे में पूछे जाने पर घटना को सही बताते हुए थाने में रिपोर्ट करना बताया गया

*घटनाक्रम एवं आंदोलन के बारे में आंदोलनकारियो से चर्चा करने के लिए संपर्क करने पर आंदोलनकारियो के मोबाइल नंबर स्वीच ऑफ बताया गया जिसके कारण संपर्क नही हो सका*

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