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Bharat Bandh: कृषि बिलों के खिलाफ किसानों के भारत बंद का व्यापक असर, विपक्ष का मिल रहा पूरा समर्थन

Bharat Bandh: कृषि बिलों के खिलाफ किसानों के भारत बंद का व्यापक असर, विपक्ष का मिल रहा पूरा समर्थन

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नई दिल्ली: कृषि बिल के विरोध में आज किसानों ने भारत बंद का एलान किया है। पंजाब, हरियाणा में इस बंद का व्यापक असर दिख रहा। सुबह से ही पंजाब में कई जगहों पर किसानों रेल की पटरियों पर कब्जा कर लिया है। हरियाणा में भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। संसद में अभी हाल में पारित किए गए दो कृषि बिलों के खिलाफ किसानों के इस बंद को देशभर के 31 किसान संगठनों का समर्थन हांसिल है। इसके अलावा देश विपक्षी पार्टियों ने भी किसानों के इस भारत बंद का समर्थन किया है।

कांग्रेस ने भी कृषि बिलों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है। कांग्रेस नेता ए.के. एंटनी ने कहा, ’24 सितंबर से सरकार को काले कानून वापस लेने के लिए कहते हुए कांग्रेस ऑल-इंडिया में प्रदर्शन करेगी।’ विपक्ष की तरफ से भारी विरोध के बावजूद राज्यसभा में दो बिल- कृषि सेवा पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता विधेयक तथा आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020 को पास कराया गया।

हरियाणा में भारतीय किसान यूनियन समेत कई संगठनों ने कहा है कि उन्होंने विधेयकों के खिलाफ कुछ किसान संगठनों द्वारा आहूत राष्ट्रव्यापी हड़ताल का समर्थन किया है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने प्रदर्शन के दौरान किसानों से कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने और कोरोना वायरस से जुड़े सभी नियमों का पालन करने की अपील की है।

पंजाब में किसानों का लगातार विरोध प्रदर्शन को देखते हुए एहतियातन कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। भारी तादाद में विरोध जताते हुए किसान रेल लाइनों पर बैठ किसान बिल के खिलाफ कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि सरकार अगर उनकी बात नहीं सुनती तो वो सभी 1 अक्टूबर से अनिश्चितकाल के लिए रेल यातायात ठप करेंगे।

ये गाड़ियां हैं रद्द

अमृतसर-मुंबई सेंट्रल, अमृतसर-कोलकाता, अमृतसर-न्यू जलपाईगुडी, अमृतसर-बांद्रा टर्मिनस, अमृतसर-हजूर साहिब नांदेड़, अमृतसर-हरिद्वार, अमृतसर-जयनगर, अमृतसर-जयनगर(2), जम्मूतवी-नई दिल्ली, अमृतसर-डिब्रूगढ़,  फिरोजपुर कैंट-धनबाद, अमृतसर-न्यू जलपाईगुडी(2), अमृतसर-जयनगर(3) और अमृतसर-बांद्रा टर्मिनस(2)।

दोनों सदनों से पास है ये बिल

कृषि बिलों को लोकसभा और राज्यसभा से मंजूरी मिल चुकी है और अब ये राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास हैं। विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे इन बिलों को अपनी स्वीकृति न दें। वे चाहते हैं कि सरकार इन बिलों को वापस ले ले।

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